यमुनानगर आजिम हत्याकांड : DNA सैंपल विवाद की विभागीय जांच में 2 पुलिसकर्मी दोषी, दोनों की वेतन वृद्धि रोकी
punjabkesari.in Thursday, Sep 24, 2026 - 07:40 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): यमुनानगर के गांधी नगर थाना क्षेत्र में आजिम की हत्या से जुड़े मामले में DNA जांच के लिए सुरक्षित रखे गए नमूनों को नष्ट किए जाने के मामले में विभागीय जांच पूरी हो गई है। जांच में ASI विनोद कुमार और EASI प्रदीप सिंह को दोषी पाया गया। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोक दी गई हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले में मोहम्मद अशरफ की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत के संबंध में अदालत की ओर से आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। अब हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही के अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा करनी होगी। यह आदेश जस्टिस संजय वशिष्ठ ने पारित किया।
हत्या के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
मामला आजिम की हत्या से संबंधित है। गांधी नगर थाना, यमुनानगर में आठ जनवरी 2021 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रारंभ में मामला धारा 346 के तहत दर्ज किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर इसमें हत्या, अपहरण, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश समेत अन्य धाराएं जोड़ी गईं।
मृतक की पहचान को लेकर डीएनए जांच महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सामने आई थी। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की थी।
पहली DNA रिपोर्ट में नमूने नहीं मिले तुलना योग्य
मामले में 29 सितंबर 2021 को एफएसएल मधुबन में मृतक के अवशेष से लिए गए नमूने और उसकी मां के रक्त नमूने की जांच की गई। एफएसएल रिपोर्ट में दोनों नमूनों को ‘तुलना योग्य नहीं’ बताया गया।
इसके बाद निचली अदालत ने एक जून 2023 को मामले में दोबारा डीएनए जांच कराने का आदेश दिया। अदालत ने इसके लिए मृतक के सुरक्षित अवशेष एफएसएल मधुबन भेजने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद नमूनों को सुरक्षित रखना जांच के लिहाज से अहम था।
दिसंबर 2023 में नमूने नष्ट करने का सामने आया मामला
आठ अगस्त 2024 को अदालत के समक्ष यह जानकारी आई कि गांधी नगर थाने ने 26 दिसंबर 2023 को मामले से संबंधित नमूने एमएमजे हेड कांस्टेबल बलवान सिंह को वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर नष्ट करने के लिए सौंप दिए थे। इसके बाद थाने के मालखाने में डीएनए जांच से संबंधित नमूने उपलब्ध नहीं पाए गए। इस घटनाक्रम को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया, क्योंकि इससे पहले ही निचली अदालत दोबारा डीएनए जांच कराने के निर्देश दे चुकी थी।
हाई कोर्ट ने फरवरी 2025 में जताई थी नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पांच फरवरी 2025 को पुलिस के आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि यदि एक जून 2023 के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करते हुए नमूनों को नष्ट किया गया है तो संबंधित अधिकारी के पद अथवा रैंक की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को भी पूरे मामले पर ध्यान देने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
विभागीय जांच में दो अधिकारी दोषी
इसके बाद पुलिस विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में विभागीय जांच कराई गई। जांच में एएसआई विनोद कुमार और ईएएसआई प्रदीप सिंह को दोषी पाया गया। दोनों को दंडित करते हुए उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का आदेश दिया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारी एसआई राजेश कुमार और तत्कालीन थाना प्रभारी मेहरूफ अली के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी।
अंतिम संस्कार के बाद दोबारा डीएनए जांच की राह बंद
सुनवाई के दौरान सात मई 2025 को अदालत को बताया गया कि मृतक के शरीर का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। आवश्यक अवशेष उपलब्ध नहीं होने के कारण अब दोबारा डीएनए जांच कराना संभव नहीं है।
हाई कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई और उपलब्ध परिस्थितियों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत के संबंध में आवश्यक प्रयास किए जा चुके हैं। अब हत्या के मूल मामले में ट्रायल कोर्ट के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी। इसी टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने मोहम्मद अशरफ की याचिका का निपटारा कर दिया।
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