Gleeden और IPSOS सर्वे का खुलासा: भारतीय रिश्तों में AI बना नया ‘इंटिमेट पार्टनर’
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 08:05 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल ई-मेल लिखने या ऑफिस कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीयों के निजी जीवन और रिश्तों में भी गहराई से प्रवेश कर चुका है। महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए बनाए गए दुनिया के सबसे बड़े एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग प्लेटफॉर्म **Gleeden** ने भारत में 40 लाख (4 मिलियन) यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले दो वर्षों में महिला यूजर्स की संख्या में 148% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। **IPSOS** और Gleeden द्वारा संयुक्त रूप से किए गए एक विस्तृत अध्ययन में सामने आया है कि आधुनिक भारतीय रिश्तों में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। सर्वे में भारत के टियर-1 और टियर-2 शहरों के 1500 लोगों को शामिल किया गया, ताकि यह समझा जा सके कि AI किस तरह डेटिंग, भावनात्मक जुड़ाव और बेवफाई की परिभाषा बदल रहा है।
AI के साथ अंतरंग बातचीत को प्राथमिकता दी। हालांकि, 65% लोगों का मानना है कि AI के साथ इस प्रकार का संवाद भी “धोखा” (cheating) की श्रेणी में आ सकता है। लगभग 63% लोगों ने डेटिंग के दौरान मैसेज का विश्लेषण करने और पहली मुलाकात को सफल बनाने के लिए AI की मदद ली। वहीं, 60% ने संबंध परामर्श या व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए AI का उपयोग किया, जबकि 64% ने अपने जीवनसाथी के साथ रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में AI की सहायता ली। सर्वे में 54% लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक वर्चुअल AI पार्टनर बनाया है, जिसके साथ वे निजी संवाद करते हैं। वहीं 49% ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से सार्वजनिक हस्तियों या परिचितों से जुड़ी परिवर्तित (डीपफेक) सामग्री तैयार की। इन मामलों में महिला और पुरुषों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि 92% लोग अपने रोमांटिक जीवन से और 89% अपने निजी जीवन से संतुष्ट होने के बावजूद 57% ने खुद को “अकेला” महसूस करने की बात स्वीकार की। यह संकेत देता है कि भावनात्मक खालीपन AI की ओर झुकाव का बड़ा कारण बन रहा है।
बढ़ती लत और सामाजिक झिझक
46% उत्तरदाताओं ने माना कि AI के प्रति उनका आकर्षण अन्य डिजिटल आदतों जितना ही प्रभावशाली हो गया है।
* 60% से अधिक लोग मानते हैं कि AI के साथ अंतरंग संवाद बेवफाई माना जा सकता है।
* लगभग 70% लोग यह जानकर चौंक जाएंगे कि उनका पार्टनर AI के साथ निजी बातचीत करता है।
* 70% लोग अपने AI चैट इतिहास को पार्टनर के साथ साझा करने में असहज हैं, जिनमें महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक संकोच महसूस करती हैं।
Gleeden इंडिया की कंट्री मैनेजर **Sybil Shiddell** ने कहा कि लोग इस नई डिजिटल दुनिया को जिज्ञासा और अपराधबोध, दोनों भावनाओं के साथ खोज रहे हैं। उनके अनुसार, रिश्तों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग सीमाएं कैसे तय करते हैं, ईमानदारी को कैसे बनाए रखते हैं और AI के दौर में अंतरंगता को किस नजरिए से समझते हैं। भारत में जहां तलाक दर कई देशों की तुलना में कम है और बड़ी संख्या में शादियां अरेंज मैरिज होती हैं, वहीं यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि तकनीक अब दंपतियों के आपसी संबंधों को नए सिरे से परिभाषित कर रही है। AI अब केवल एक सहायक नहीं, बल्कि भावनात्मक साझेदार की।