कभी स्कूल से बाहर फैंक दिया था बैग...आज अजीत सैनी इसरो में हुआ सेलेक्ट, बधाई देने वालों का लगा तांता

punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 04:51 PM (IST)

पानीपत (सचिन शर्मा) : वो कहावत तो आपने सुनी होगी... वक्त बदलता है जिंदगी के साथ, जिंदगी बदलती है वक्त के साथ। एक वक्त था जब छठी क्लास के अजीत सैनी का बैग स्कूल वालों ने क्लास से बाहर फेंक दिया था, उसी अजीत ने मेहनत के बल पर वक्त को बदलते हुए इसरो में सलेक्ट होकर हरियाणा का नाम रोशन कर दिया।

इसरो में चयन होने के बाद अजीत सैनी पहली बार अपने नानके पानीपत के उग्राखेड़ी गांव पहुंचे तो गांव के गणमान्य लोगों ओर सरकारी स्कूल के स्टाफ ने अजीत ओर उनके माता-पिता का जोरदार स्वागत किया। अजीत पहले अपने नाना के घर नहीं गए बल्कि यू सरकारी स्कूल के बच्चों को मोटिवेट करने के लिए उनके बीच पहुंचे। इस स्कूल में अक्सर बचपन में अजीत आते-जाते रहते थे। अजीत ने बच्चों को बताया कि गरीबी सफलता को रोक नहीं सकती, अगर आप जीवन में लक्ष्य लेकर चलो। 

स्कूल वालों ने क्लास से बाहर फेंक दिया था अजीत का बैग

आपको बता दें इसरो में वैज्ञानिक के तौर पर सलेक्ट होने वाले अजीत सैनी, करनाल जिले के डिपो जनेसरो गांव के रहने वाले  अजीत का जन्म बेहद  सामान्य परिवार में हुआ था। अजीत के पिता रामपाल मां छन्नो देवी ने अजीत को मेहनत मजदूरी करके पढ़ाया लिखाया। बेटे की सफलता पर भावुक होते हुए मां छन्नो देवी ने कहा कि वह बेहद गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। बचपन में छठी क्लास में स्कूल वालों ने अजीत का बैग उठाकर क्लास से  बाहर फेंक दिया था, अजीत रोता हुआ घर आया और मां को बोला एक दिन ऐसा करके दिखाऊंगा, जिससे लोगो को नाज होगा। बेटे की सफलता देख मां छनो देवी भावुक हो गई। बेटे की सफलता पर गर्व से बोलते हुए पिता रामपाल ने कहा कि मेरे बेटे ने बचपन में ही मुझे कहा था कि पिता जी एक दिन बड़ा काम करके दिखाऊंगा और आज मेरे बेटे अजीत ने वह बड़ा काम करके दिखा दिया है। 

चंद्रयान का पहला मिशन असफल होने के बाद अजीत के मन में इसरो में जानें की जागी इच्छा

वहीं अपनी सफलता पर अजीत ने बताया कि चंद्रयान का पहला मिशन असफल होने के बाद अजीत के मन में इसरो में जाकर कुछ कर गुजरने की इच्छा जागी। जब इंडियन स्पेस एजेंसी चंद्रयान का पहला मिशन असफल हुआ तो अजीत के मन में इसरो में जाकर कुछ कर गुजरने की इच्छा जागी। इसरो ने चंद्रयान को चांद पर भेजा और मिशन असफल हो गया था, तब उनके मन में इच्छा हुई कि इसरो में जाकर देश के लिए कुछ कर सकूं।

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Content Writer

Manisha rana

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