काफिले नहीं, अपनापन: दोपहिया पर निकले विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण"

punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 09:57 AM (IST)

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): सुबह का समय था। घरौंडा का बाजार अपनी रफ्तार पकड़ रहा था। दुकानों के शटर खुल रहे थे, चाय की केतलियों से भाप उठ रही थी और समोसे की खुशबू पूरे बाजार में फैल रही थी। तभी एक दोपहिया वाहन धीरे-धीरे बाजार की सड़क पर पहुंचता है। न आगे लालबत्ती, न पीछे गाड़ियों का काफिला, न सुरक्षा कर्मियों की भीड़। वाहन रुका, सवार नीचे उतरे और सीधे समोसे की दुकान की ओर बढ़ गए। दुकानदार ने मुस्कुराकर स्वागत किया, आसपास खड़े लोगों ने हाथ मिलाए और कुछ ही मिनटों में वहां अपनत्व का माहौल बन गया।

जब लोगों को पता चला कि यह कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि *हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण* हैं, तो हर कोई हैरान रह गया। किसी ने तस्वीरें खींचीं, किसी ने वीडियो बनाया और देखते ही देखते यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

 प्रोटोकॉल तोड़ा, दिल जीता
लोकतंत्र में संवैधानिक पद के साथ प्रोटोकॉल और सुरक्षा का दायरा अपने आप बढ़ जाता है। वीआईपी कल्चर, काफिले और सुरक्षा घेरे आज राजनीति की पहचान बन चुके हैं। लेकिन हरविंदर कल्याण ने इस सोच को तोड़ दिया।

उनका मानना है कि जनता से दूरी बनाकर जनप्रतिनिधित्व नहीं किया जा सकता। घरौंडा की गलियों में वे आज भी उसी सहजता से घूमते हैं, जैसे वर्षों पहले एक विधायक के रूप में लोगों के बीच पहुंचते थे। उनके लिए बाजार की चाय, समोसे की दुकान और पुराने साथियों से मुलाकात किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है। पद की ऊंचाई के बावजूद उनका व्यवहार जमीन से जुड़ा हुआ है।

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चाय-समोसे पर बनी जनसेवा की चर्चा
समोसे की दुकान पर रुकना उनके लिए केवल नाश्ता नहीं था। वह वहां खड़े हर व्यक्ति से आंख मिलाकर बात करते हैं, बच्चों से नाम पूछते हैं और बुजुर्गों का हालचाल लेते हैं। दुकानदार से व्यापार की स्थिति पूछते हैं और ग्राहकों की समस्याएं भी सुन लेते हैं।

उनके लिए यह केवल औपचारिक जनसंपर्क नहीं है। यह वर्षों से बने विश्वास और आत्मीय रिश्तों को जीवित रखने का माध्यम है। बाजार में मौजूद लोगों का कहना था कि "अध्यक्ष जी आए तो लगा कोई अपना ही आ गया हो"। शायद यही कारण है कि घरौंडा के लोग उन्हें नेता कम और परिवार का सदस्य अधिक मानते हैं।

तीन बार जीत का राज: जनता के बीच निरंतरता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घरौंडा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने जाने के पीछे हरविंदर कल्याण की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी और जनता से सीधा संवाद है। वे चुनावी मौसम के नेता नहीं हैं। चुनाव जीतने के बाद 5 साल तक गायब हो जाना उनकी राजनीति का हिस्सा नहीं। सुबह बाजार का चक्कर लगाना, दोपहर को गांवों में चौपाल लगाना और शाम को कार्यकर्ताओं से मिलना - यह उनका रोज का रूटीन है। 

जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना उनकी कार्यशैली है। यही निरंतर संपर्क उन्हें जनता की नब्ज से जोड़े रखता है और इसी कारण मतदाता भी उन पर बार-बार भरोसा जताते हैं।

शांत स्वभाव, ठोस काम
हरविंदर कल्याण का व्यक्तित्व शांत, संतुलित और संयमित माना जाता है। वे अनावश्यक बयानबाजी और सुर्खियों से बचते हैं। उनका साफ कहना है कि "काम बोलता है, नेता नहीं"।

विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, जनसमस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करना और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना उनकी प्रशासनिक शैली की पहचान है। वे अधिकारियों की बैठक में आंकड़ों के साथ आते हैं और हर समस्या का फॉलोअप लेते हैं। 

यही कारण है कि अधिकारियों के बीच भी उन्हें एक व्यवस्थित और परिणामोन्मुख जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। उनके कार्यालय में "पेंडिंग फाइल" शब्द लगभग नहीं के बराबर है।

विकास पहले, दिखावा बाद में
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास को उन्होंने हमेशा प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की असली पहचान बड़े-बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में दिखाई देने वाले बदलावों से बनती है।

घरौंडा क्षेत्र में नए स्कूल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पक्की सड़कें और पेयजल योजनाओं को गति देना उनकी प्राथमिकता रही है। वे कहते हैं कि विकास के लिए फीता काटना जरूरी नहीं, फील्ड पर उतरकर काम करना जरूरी है।  दिखावे और आडंबर से उन्हें हमेशा दूरी रही है। इसी कारण उनका नाम किसी विवाद या घोटाले से नहीं जुड़ा।

संस्कारों से सीखी जनसेवा
15 जनवरी 1967 को घरौंडा में जन्मे हरविंदर कल्याण को समाजसेवा और जनहित की भावना पारिवारिक संस्कारों से मिली। बचपन से ही उन्होंने अपने घर में लोगों की मदद करने और उनकी समस्याएं सुनने का माहौल देखा।
राजनीति में आने से पहले भी वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे। लोगों के बीच रहना, उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान की सोच विकसित करना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया। आज भी वही संस्कार उनके सार्वजनिक जीवन में साफ दिखाई देते हैं। वे मानते हैं कि जनसेवा कोई पद नहीं, एक जिम्मेदारी है।

सदन में गरिमा, क्षेत्र में अपनापन
वर्तमान में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष के रूप में हरविंदर कल्याण सदन की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और निष्पक्ष संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। विधानसभा में वे सभी दलों को साथ लेकर चलने और मर्यादा बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इसके साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र में वे उसी सहजता के साथ लोगों के बीच उपस्थित रहते हैं, जिसने उन्हें एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि बनाया। चंडीगढ़ में अध्यक्ष और घरौंडा में "अपना हरविंदर" - दोनों भूमिकाएं वे समान जिम्मेदारी से निभाते हैं।

असली जननेता की पहचान
आज जब राजनीति की पहचान अक्सर सुरक्षा घेरे, बड़े काफिलों और प्रोटोकॉल से होती है, तब हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण की दोपहिया वाहन पर बाजार की सैर एक अलग संदेश देती है।  यह संदेश है कि जनता का विश्वास सुरक्षा घेरे से नहीं, बल्कि सहज व्यवहार, आत्मीय संवाद और निरंतर जनसेवा से जीता जाता है। पद मिल जाने के बाद भी जमीन से जुड़े रहना ही असली जननेता की पहचान है।

शायद यही वजह है कि घरौंडा की गलियों में जब हरविंदर कल्याण दोपहिया वाहन पर नजर आते हैं, तो लोग उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि 'अपने हरविंदर' के रूप में पहचानते हैं। और किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए इससे बड़ी उपलब्धि शायद कोई दूसरी नहीं हो सकती।


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Content Writer

Isha

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