इंस्पेक्टर के अपहरण मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 10:08 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): पुलिस इंस्पेक्टर का अपहरण कर उनसे मारपीट, लूटपाट और बंधक बनाने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी पहले भी जमानत का दुरुपयोग कर कई वर्षों तक फरार रह चुका है, ऐसे में उसे दोबारा राहत देने से मुकदमे की सुनवाई प्रभावित हो सकती है और उसके फिर भागने की प्रबल आशंका है।
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घटना 30 जून 2016 की है इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह फोगाट अपनी निजी स्विफ्ट कार से डीसीपी ईस्ट कार्यालय जा रहे थे। रास्ते में गैलेरिया-सुशांत लोक के पास उन्होंने चार युवकों को संदिग्ध अवस्था में देखा और पूछताछ के उद्देश्य से अपनी कार में बैठा लिया। हालांकि, कार में बैठते ही चारों युवकों ने इंस्पेक्टर फोगाट पर हमला कर दिया और उन्हें बंधक बना लिया। अपराधियों ने उन्हें कार की डिक्की में कई घंटों तक बंधक बनाए रखा और कोसीकलां (उत्तर प्रदेश) थाना क्षेत्र के एक सुनसान इलाके में ले जाकर फेंक दिया। इस दौरान आरोपी उनसे जबरन एटीएम पिन पूछकर नकदी, दो मोबाइल फोन और उनकी स्विफ्ट कार लूटकर फरार हो गए थे। मामले में थाना सेक्टर-29 पुलिस ने केस दर्ज की थी।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल 7 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में है। कुछ गलतफहमी के कारण वह पहले अदालत में पेश नहीं हो पाया था, इसलिए उसे जमानत दी जाए। सरकारी वकील ने जमानत याचिका का जोरदार विरोध करते हुए बताया कि आरोपी को वर्ष 2017 में ही जमानत मिल गई थी,लेकिन इसके तुरंत बाद वह अदालत की कार्रवाइयों से अनुपस्थित होकर फरार हो गया, जिसके चलते अदालत ने उसे कानूनी रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया था। दोनों पक्षों की गहन सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने आरोपी के पिछले आपराधिक आचरण को ध्यान में रखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने पूर्व में दी गई जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। ऐसे में उसे पुन:जमानत देने से न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने और उसके फिर से फरार होने का गंभीर जोखिम है।