चानौत जल आंदोलन: जहां से प्रशासन ने उखाड़ा था टी-पॉइंट, वहीं दोबारा लगाया गया कनेक्शन; ग्रामीणों में खुशी की लहर

punjabkesari.in Wednesday, Jul 15, 2026 - 08:55 PM (IST)

हांसी/चानौत (अमनदीप पिलानिया) : पिछले 61 दिनों से जारी चानौत जल आंदोलन का आखिरकार समाधान निकल आया। जिस स्थान से प्रशासन ने पहले टी-पॉइंट हटाया था, उसी स्थान पर बुधवार को दोबारा 4 इंच का टी-कनेक्शन लगा दिया गया। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की वापसी पर भी सहमति बनी है। टी-कनेक्शन लगते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया और ग्रामीणों ने इसे अपने लंबे संघर्ष की जीत बताया।

गौरतलब है कि चानौत गांव के ग्रामीण भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से 4 इंच के टी-कनेक्शन के माध्यम से स्थायी पेयजल आपूर्ति की मांग को लेकर पिछले 61 दिनों से आंदोलन कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसका समाधान मुख्य पाइपलाइन से टी-कनेक्शन देने से ही संभव है।

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आंदोलन के दौरान प्रशासन द्वारा टी-पॉइंट हटाने के बाद मामला और अधिक गर्मा गया था। इसके विरोध में ग्रामीणों ने धरना जारी रखा और खाप पंचायतों, किसान संगठनों व सामाजिक संस्थाओं का समर्थन भी आंदोलन को मिलने लगा। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया था।

इसी बीच केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मामले में हस्तक्षेप किया। हांसी स्थित रेस्ट हाउस में चानौत संघर्ष समिति और प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद सहमति बनी। समझौते के तहत गांव को 4 इंच का टी-कनेक्शन देने और आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की वापसी पर सकारात्मक निर्णय लिया गया।

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बैठक के बाद प्रशासन ने उसी स्थान पर दोबारा टी-कनेक्शन स्थापित कर दिया, जहां से पहले इसे हटाया गया था। जैसे ही टी लगाने का कार्य पूरा हुआ, गांव के लोगों और आंदोलन में शामिल किसानों ने खुशी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि यह जीत 61 दिनों तक चले शांतिपूर्ण संघर्ष, गांव की एकजुटता तथा खाप पंचायतों और किसान संगठनों के समर्थन का परिणाम है।

उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 17 जुलाई को जींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान उत्तर भारत की खाप पंचायतों और किसान संगठनों के साथ अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि, अब टी-कनेक्शन लगने और सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त होने की राह साफ हो गई है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब गांव की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान होगा और नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जींद दौरे से पहले इस विवाद का समाधान होने से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।

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Content Editor

Krishan Rana

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