शिक्षकों के तबादले में अब फंसा ये पेच, सैकड़ों शिक्षक असमंजस और परेशानी की स्थिति में... जानिए कारण

punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 11:21 AM (IST)

चंडीगढ़: प्रदेश में चल रही शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव में इस बार क्रॉनिक डिजीज (दीर्घकालिक बीमारी) से जुड़े मामलों ने बड़ा पेंच फंसा दिया है। शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के चलते सैकड़ों शिक्षक असमंजस और परेशानी की स्थिति में हैं।

विभाग ने 5 दिसंबर 2025 को एक पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि ट्रांसफर ड्राइव में क्रॉनिक डिजीज के आधार पर नंबर पाने के लिए केवल 9 चिह्नित मेडिकल संस्थानों से बने सर्टिफिकेट ही मान्य होंगे। इससे पहले तक जिला स्तर पर सीएमओ द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट मान्य होते रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट रूप से यह भी नहीं कहा है कि पुराने सीएमओ के स्तर के सर्टिफिकेट अमान्य हो चुके हैं।

इन नए निर्देशों के तहत शिक्षकों को 18 दिसंबर 2025 तक नौ मेडिकल संस्थानों से प्रमाण पत्र बनवाकर जमा कराने की अंतिम तिथि दी गई थी लेकिन कई शिक्षकों को समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल पाई।  हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2006 में निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन को भंग करने व प्रशासक की नियुक्ति के लिए कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए विश्वविद्यालय के विघटन और प्रशासन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए धारा 44


वह विभागीय निर्देशों को समझ पाए तब तक अंतिम तारीख निकल चुकी थी। अब स्थिति यह है कि जिन शिक्षकों ने देरी से नौ मेडिकल कॉलेजों से क्रॉनिक डिजीज सर्टिफिकेट बनवाए विभाग उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा। जबकि कई मामले वास्तविक और पात्रता की श्रेणी में आते हैं। इसको लेकर जिला स्तर पर आपत्तियां लगाई गई लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक ये आपत्तियां शिक्षा विभाग के मुख्यालय पहुंचनी शुरू हो गई हैं। खास बात यह है कि पिछली ट्रांसफर ड्राइव में सीएमओ स्तर के सर्टिफिकेट पर भी कई शिक्षकों को क्रॉनिक डिजीज के अंक दिए गए थे। एक और उलझन यह है कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज को सर्टिफिकेट के लिए मान्य तो किया गया लेकिन वहां पति-पत्नी के मामलों को स्पाउस कैटेगरी में प्राथमिकता नहीं दी जा रही जिससे कपल केस वाले शिक्षक भी नाराज हैं


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Content Writer

Isha

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