देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरियाणा से शुरू होगी भारत की हरित रेल क्रांति, जींद बनेगा नए युग का प्रवेश द्वार
punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 11:38 AM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी ): भारतीय रेलवे के 170 से अधिक वर्षों के इतिहास में 17 जुलाई 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। इस दिन हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का शुभारंभ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह केवल एक नई रेल सेवा की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत के परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के नए युग का आगाज है।
दुनिया आज जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत का हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन की दिशा में कदम बढ़ाना इस बात का संकेत है कि देश भविष्य की तकनीकों को अपनाने में पीछे नहीं है। हरियाणा से शुरू होने वाली यह परियोजना आने वाले समय में भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की नई पहचान बन सकती है।
हरियाणा को मिली ऐतिहासिक उपलब्धि
हरियाणा पहले भी अनेक राष्ट्रीय परियोजनाओं का केंद्र रहा है, लेकिन देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू होना प्रदेश के लिए विशेष गौरव का विषय है। जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन केवल हरियाणा के यात्रियों की सुविधा नहीं बढ़ाएगी, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल परियोजना साबित होगी।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में अन्य राज्यों के रेल मार्गों पर भी इसी प्रकार की हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।

क्या है हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक?
हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुआं या जहरीली गैसें नहीं निकलतीं, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित होती है।
यही कारण है कि हाइड्रोजन ट्रेन को भविष्य का सबसे स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल रेल परिवहन माना जा रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
अक्सर नई तकनीक का मतलब महंगा किराया माना जाता है, लेकिन भारतीय रेलवे ने इस ट्रेन को आम जनता की पहुंच में रखने का निर्णय लिया है।
रेलवे ने न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपये तथा अधिकतम 25 रुपये निर्धारित किया है। अर्थात आधुनिक तकनीक का लाभ आम यात्रियों को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के मिलेगा।
अब एक घंटे में पूरा होगा सफर
जींद और सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर की दूरी वर्तमान में डीएमयू ट्रेन लगभग दो घंटे में तय करती है।
नई हाइड्रोजन ट्रेन यही दूरी लगभग एक घंटे में पूरी करेगी। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों का समय बचेगा तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

एक बार ईंधन भरने पर लंबी दूरी तय करेगी ट्रेन
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी ईंधन क्षमता है।
एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद यह ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर तक लगातार चल सकेगी। इससे बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता नहीं होगी तथा परिचालन अधिक प्रभावी और किफायती बनेगा।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस है ट्रेन
इस ट्रेन में लगभग 1200 किलोवाट क्षमता का आधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है। रेलवे के अनुसार यह दुनिया के सबसे लंबे और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट्स में से एक है। इसमें
- 8 आधुनिक यात्री कोच
- 2 ड्राइविंग पावर कोच
- लगभग 2400 किलोवाट की कुल शक्ति उपलब्ध कराई गई है।
- यह तकनीक भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग कौशल और "मेक इन इंडिया" अभियान की सफलता का भी प्रमाण है।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
ट्रेन के डिब्बों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है।
यात्रियों को आरामदायक सीटें, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित यात्रा, आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम तथा उन्नत सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इस ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्रियों के सफर करने की क्षमता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी कुल क्षमता 2638 यात्रियों तक बताई जा रही है।
दुनिया के चुनिंदा देशों की श्रेणी में भारत
अब तक जर्मनी, चीन और कुछ अन्य विकसित देशों ने ही हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक पर कार्य किया है।
भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का भी प्रमाण है।
यह परियोजना भारतीय इंजीनियरों और रेलवे वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
रेलवे के लिए नई दिशा
रेल मंत्रालय की दीर्घकालिक योजना रेलवे को अधिक पर्यावरण अनुकूल, ऊर्जा दक्ष और कम प्रदूषण वाला बनाना है।
हाइड्रोजन ट्रेनें भविष्य में उन रेल मार्गों पर विशेष रूप से उपयोगी साबित होंगी जहां विद्युतीकरण कठिन या अत्यधिक खर्चीला है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में देश के कई अन्य राज्यों में भी हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित की जा सकती हैं।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर मजबूत कदम
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
हाइड्रोजन आधारित रेल सेवा इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। डीजल की खपत कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा के विकास को मिलेगा नया आयाम
इस परियोजना से केवल रेलवे को ही लाभ नहीं मिलेगा बल्कि हरियाणा की औद्योगिक, आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
जींद और सोनीपत के बीच तेज रेल संपर्क से व्यापार, रोजगार, शिक्षा और निवेश के नए अवसर विकसित होंगे। भविष्य में यह रेल कॉरिडोर हरित औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और हरित विकास की संयुक्त सफलता का प्रतीक है।
17 जुलाई को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद से इस ट्रेन को रवाना करेंगे, तब भारतीय रेलवे केवल नई पटरी पर नहीं दौड़ेगी, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और भविष्य की विकास यात्रा भी नई रफ्तार पकड़ लेगी।
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मुख्य विशेषताएं
- भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन।
- 17 जुलाई को जींद से शुभारंभ।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे लोकार्पण।
- जींद–सोनीपत के बीच लगभग 90 किमी का सफर।
- यात्रा समय लगभग एक घंटा।
- किराया ₹5 से ₹25 तक।
- एक बार हाइड्रोजन भरने पर लगभग 250 किमी संचालन।
- आधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक।
- पर्यावरण अनुकूल, लगभग शून्य कार्बन उत्सर्जन।
- ग्रीन ट्रांसपोर्ट और "मेक इन इंडिया" अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि।