हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में बड़ी पहल, बीमार नवजात से दूर नहीं होगी मां...प्रदेश के 29 SNCU को अपग्रेड करने की तैयारी
punjabkesari.in Thursday, Nov 05, 2026 - 01:25 PM (IST)
चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में अब गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को इलाज के दौरान अपनी मां से दूर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग राज्य की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों में बदलने जा रहा है।
इस नई व्यवस्था से शिशु के इलाज के दौरान मां की 24 घंटे मौजूदगी, स्तनपान और बच्चे की शुरुआती देखभाल में परिवार की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी।
WHO के 'जीरो सेपरेशन' सिद्धांत पर आधारित व्यवस्था
यह पूरी पहल विश्व स्वास्थ्य संगठन के 'जीरो सेपरेशन'मॉडल पर आधारित है।समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को चिकित्सकीय स्थिति अनुकूल होते ही मां के पास रखा जाएगा। कंगारू मदर केयर के तहत बच्चे को मां के सीने से लगाकर त्वचा से त्वचा का संपर्क (Skin-to-Skin Contact) कराया जाता है। इससे शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, स्तनपान में आसानी होती है और मां-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।
7 करोड़ रुपये से खरीदे जाएंगे 19 नए वेंटिलेटर
डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार प्रदेश की 29 एसएनसीयू में वर्तमान में 54 वेंटिलेटर पहले से चालू स्थिति में उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को सांस लेने में मदद के लिए करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से 19 और नए वेंटिलेटर खरीदे जा रहे हैं। प्रदेश की 29 एसएनसीयू को 'फैमिली सेंटर्ड केयर' मॉडल में अपग्रेड करने की योजना है।
अंबाला और कुरुक्षेत्र की सफल पहल के बाद पूरे प्रदेश में विस्तार
इस आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल की शुरुआत सबसे पहले अंबाला और कुरुक्षेत्र से हुई थी। अंबाला सिटी में देश की पहली जिला स्तरीय MNCU स्थापित की गई थी, जिसके बाद कुरुक्षेत्र में भी ऐसी ही इकाई शुरू की गई। दोनों जिलों के सफल परिणामों के आधार पर अब इसका विस्तार पूरे हरियाणा में किया जा रहा है।अधिकारियों को 1 नवंबर 2026 तक सभी एसएनसीयू को पूरी तरह अपग्रेड करने के निर्देश जारी किए गए थे, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।