पेट्रोल-डीजल से ज्यादा तेजी से महंगा हुआ सरसों का तेल, कीमत बढ़कर हुई इतनी

2021-06-12T09:25:24.143

पलवल : एक तो कोरोना का खतरा, दूसरी गर्मी और ऊपर से बढ़ती महंगाई ने जिले के लोगों की समस्या को और बढ़ा दिया है। पहले से ही पेट्रोल डीजल के दाम में आई तेजी से परेशान लोगों को अब सरसों तेल की चढ़ती कीमतों ने परेशान कर के रख दिया है। ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि जब सरसों तेल के दाम एक साल में ही 90  रुपए से बढ़कर 200 रुपए के पार हो गए हैं । सरसों की जमाखोरी और सरसो के दाम बढऩे को  इसके लिए बड़ी वजह माना जा रहा है। सरसों के तेल के साथ साथ मूंगफली व सूरजमुखी जैसे अन्य तेलों के दाम भी खूब बढ़े हैं।

कोरोना महामारी के भयानक दौर में आम आदमी की मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहीं है। जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ खाने के तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर लोग यह कह कर सरकार का मजाक उड़ा रहे हैं की लोग महंगे पेट्रोल-डीजल पर लड़ते रहे और बाजी सरसों का तेल मार गया। शहर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी ने बताया कि मंडियों में 6500 सौ से लेकर 7000 रुपए  क्विंटल  के हिसाब से सरसों की फसल बिक रही है। इस पर 6 प्रतिशत जीएसटी और 1 प्रतिशत मंडी शुल्क अलग से लगता है। अगर एक क्विंटल सरसों की फसल का तेल निकाला जाए तो 33 किलो तेल निकलता है। जिसमें दो किलो खल जल जाती है। ऐसे में 65 किलो खल बचती है। थोक के रेट में 170 रुपए किलो तेल बिक रहा है।

इस हिसाब से 33 किलो तेल की कीमत 5610 रुपए बनती है। वहीं 65 किलो खल 30 रुपए किलो के हिसाब से उन्नीस सौ पचास की बिक रही है। पिराई 250 रुपए क्विंटल है। जबकि लोडिंग- अनलोडिंग में पांच रुपए किलो का चार्ज लग जाता है। ट्रांसपोर्ट का खर्चा अलग से है। यही वजह है कि बाजार में सरसों का तेल महंगा बिक रहा है। कोरोना से पहले यही फसल 3000 हजार से 3500 हजार रुपए क्विंटल बिक रही थी। फुटकर में तो अब सरसों का तेल 190 से 200 रुपए  किलो तक बिक रहा है। तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रहे हैं।  पिछले एक साल में पेट्रोल डीजल के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इससे परिवहन का खर्चा भी बढ़ा है।

जिले में आमतौर पर 6 खाद्य तेल का उपयोग किया जाता है। इनमें सरसो का तेल, मूंगफली का तेल,डालडा (वनस्पति तेल), रिफाइंड (सोया तेल), सूरजमुखी का तेल (सनफ्लावर ऑइल) और ताड का तेल ( पाम ऑयल) शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बीते एक साल में इन तेलों के दाम 40 से 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं। सरसो के तेल में भी कई वेरायटी होती हैं जिनमें काली सरसो का तेल 160 से 180, पीली सरसों का तेल 216 रुपए प्रति किलो, कच्छी धानी 190 से 200 रूपए का भाव है। रिफाइंड तेल जो पिछले साल जिसका टिंन 1200 से 1300 रुपए में मिल जाता था उसका आज का भाव 2300 से 2400 रुपए है। अबकी बार सरसो के भाव भी पिछले साल के मुकाबले बढ़े हैं। पिछले साल जो सरसो मंडी में 3000 से 4000 के बीच बिकी थी उसका इस साल भाव 6500 से 7500 तक रहा है।

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Content Writer

Manisha rana

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