लालच देकर खरीदे जाते थे गरीब लोगों के अकाउंट, 27 लाख ठिकाने लगाने का बड़ा खुलासा
punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 02:53 PM (IST)
करनाल- करनाल पुलिस की साइबर सेल ने एक शातिर अंतर्राज्यीय ठग गिरोह के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। पुलिस ने विजय उर्फ अरुण को प्रोडक्शन वारंट पर लिया है, जो मूल रूप से भोपाल का रहने वाला है। विजय से पहले पुलिस इस मामले में हर्ष और बाराबंकी के एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन इस गिरफ्तारी के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है।
टीचर से 27 लाख रुपए की ठगी
मामला करनाल के निगदु इलाके का है, जहां एक टीचर को फोन आता है। फोन करने वाला व्यक्ति खुद को उनका भतीजा बताता है और कहता है कि वह USA में है, उसकी तबीयत खराब है और वहां स्थिति ठीक नहीं है। मजबूरी और अपनों की चिंता में डूबे टीचर ने बिना सोचे-समझे अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ठगों के बताए खातों में 27 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब तक टीचर को असलियत का एहसास हुआ, ठग अपना काम कर चुके थे।
सबसे पहले अकाउंट सप्लायर हुआ गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। सबसे पहले हर्ष की गिरफ्तारी हुई, जो इस गिरोह का 'अकाउंट सप्लायर' था। हर्ष मासूम लोगों को थोड़े से पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल कर लेता था, ताकि ठगी की रकम उन खातों में मंगवाई जा सके। इसी कड़ी में बाराबंकी का एक शख्स भी हत्थे चढ़ा, जिसके खाते में ठगी के 4 लाख रुपए आए थे और उसने चेक के जरिए वो पैसे निकालकर गिरोह को सौंपे थे।
अब पुलिस के पास विजय उर्फ अरुण है, जिसे फतेहाबाद जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया है। विजय का काम भी लोगों को लालच देकर उनके खाते खरीदना और ठगी की रकम को 'व्हाइट' करना था। पुलिस अब इन तीनों से गहनता से पूछताछ कर रही है ताकि उस 'मास्टरमाइंड' तक पहुंचा जा सके, जिसने फर्जी भतीजा बनकर 27 लाख की इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
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