सड़क पर मिले नवजात को निजी अस्पताल ने दिया जीवनदान
punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 06:21 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): सेक्टर-29 में लावारिस हालत में मिले एक अत्यंत कमजोर नवजात शिशु को मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से बाहर निकालकर एक नया जीवन दिया है।
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फरवरी माह में सेक्टर-29 पुलिस को यह नवजात बच्चा बेहद नाजुक हालत में मिला था। जब उसे मैक्स अस्पताल लाया गया, तो उसकी स्थिति हृदय विदारक थी। बच्चे का वजन मात्र 1.5 किलोग्राम था और उसका शरीर पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चे में न तो धड़कन थी और न ही वह सांस ले पा रहा था। डॉ. कैमेलिया नोंगराम और डॉ सचिन जैन की देखरेख में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत एडवांस नियोनेटल रिससिटेशन (पुनर्जीवन प्रक्रिया) शुरू की। डॉ. कैमेलिया नोंगराम ने बताया जब बच्चा हमारे पास आया, तो उसमें जीवन के कोई लक्षण नहीं थे। हमारी टीम ने करीब 30 मिनट तक हार न मानते हुए उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। इतने लंबे समय के बाद बच्चे के शरीर में हरकत देखना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
एनआईसीयू में भर्ती इस बच्चे का नाम स्टाफ ने प्यार से बेबी मैक्स रख दिया। अगले कुछ दिनों तक वह वेंटिलेटर पर रहा, लेकिन उसकी जीने की इच्छाशक्ति इतनी प्रबल थी कि तीसरे दिन उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर और पांचवें दिन सामान्य हवा में सांस लेने के योग्य बना दिया गया। डॉ. सचिन जैन ने भावुक होते हुए कहा बेबी मैक्स हमारे वार्ड की जान बन गया था। नर्सों से लेकर डॉक्टरों तक, हर कोई अपनी शिफ्ट शुरू करने से पहले उसका हाल जानने पहुंचता था। उसने न केवल वजन बढ़ाया, बल्कि पूरे अस्पताल स्टाफ का मनोबल भी बढ़ाया।
10 मार्च को जब बेबी मैक्स को डिस्चार्ज किया गया, तब उसका वजन बढ़कर 2.56 किलोग्राम हो चुका था। वह पूरी तरह स्वस्थ, न्यूरोलॉजिकल रूप से फिट और सामान्य बच्चों की तरह सांस ले रहा था। सीडब्ल्यूसी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस की मौजूदगी में बच्चे को आगे की प्रक्रिया के लिए नागरिक अस्पताल, गुरुग्राम स्थानांतरित कर दिया गया है। यह कहानी न केवल चिकित्सा जगत की सफलता है, बल्कि उन हाथों को भी सलाम है जिन्होंने एक लावारिस मासूम को अपना मानकर उसे मौत की दहलीज से वापस खींच लिया।