कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के VC बने सरकार की कठपुतली, सिक्योरिटी इंचार्ज कर रहे ABVP के लिए काम: जसविंदर खैहरा
punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2026 - 10:50 AM (IST)
कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हाल ही में सामने आई घटनाओं ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की निष्पक्षता और स्वायत्तता को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।
डॉ. जसविंदर खैहरा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का मौजूदा माहौल अत्यंत चिंताजनक है और यहां प्रशासन की भूमिका एक स्वतंत्र संस्था के बजाय सरकार के प्रभाव में काम करने वाली कठपुतली जैसी प्रतीत हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर का रवैया छात्रों और लोकतांत्रिक मूल्यों के हित में नहीं दिख रहा, बल्कि एकतरफा निर्णयों और दबाव में की जा रही कार्रवाइयों को दर्शाता है। इससे न केवल विश्वविद्यालय की साख को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि छात्रों के बीच असंतोष और असुरक्षा का माहौल भी लगातार गहराता जा रहा है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के सिक्योरिटी इंचार्ज आनंद कुमार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पद पर निष्पक्षता और संतुलन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहीं से पक्षपात के संकेत मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिक्योरिटी इंचार्ज एक विशेष छात्र संगठन ABVP के पक्ष में कार्य कर रहे हैं, जो विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक वातावरण को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बौद्धिक और ऐतिहासिक धरोहर है, जिसने हमेशा छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ स्वतंत्र विचार और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा दी है। लेकिन वर्तमान में यही संस्थान प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते अपनी मूल पहचान से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है। 7 अप्रैल को विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए डॉ. खैहरा ने कहा कि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था। इसके बावजूद 13 दिन बाद, 19 अप्रैल को अचानक FIR दर्ज किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि कोई घटना आपराधिक थी, तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और यदि नहीं थी, तो इतने दिनों बाद यह कदम क्यों उठाया गया?
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह FIR राजनीतिक द्वेष भावना के तहत दर्ज की गई प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य विपक्षी आवाजों को दबाना और छात्र नेतृत्व को कमजोर करना है। इस प्रकार की कार्रवाइयां लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इससे छात्रों के बीच भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा होता है। डॉ. खैहरा ने यह भी कहा कि प्रशासन की ऐसी कार्यशैली विश्वविद्यालय की गरिमा के विरुद्ध है और इससे छात्रों का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, गरिमा और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर उनके साथ प्रमुख रूप से थानेसर हल्का अध्यक्ष योगेश शर्मा, युवा जेजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष विशाल मुकीमपुरा, युवा प्रदेश सचिव नवीन सिहाग, शेखर डोगरा सहित अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।