गब्बर के एक्शन से बिना सरकारी अनुमति कॉलोनियां काटने वालों पर हरियाणा में हो सकता है बड़ा एक्शन
punjabkesari.in Sunday, May 31, 2026 - 12:53 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा में "गब्बर" के नाम से प्रसिद्ध ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज द्वारा यमुनानगर में की गई सख्त कार्रवाई अब पूरे प्रदेश में बिना सरकारी अनुमति कॉलोनियां विकसित करने वालों और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन न करने वाले अधिकारियों के लिए चेतावनी बन सकती है। यमुनानगर की ग्रीवेंस कमेटी बैठक में सामने आए एक मामले ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं, बल्कि प्रदेशभर में वर्षों से चल रहे अवैध कॉलोनी कारोबार की परतें भी उधेड़ दी हैं।
मंत्री विज का गुस्सा किसी सामान्य शिकायत पर नहीं था। मामला कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग, नियमों की अनदेखी और सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचाने से जुड़ा हुआ था। सुनवाई के दौरान जब संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। रिकॉर्ड में कृषि भूमि दर्ज होने के बावजूद वहां आवासीय प्लॉटों की रजिस्ट्रियां कैसे हुईं, बिना सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) के कॉलोनियां कैसे विकसित हो गईं और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की, इन सवालों का स्पष्ट उत्तर अधिकारियों के पास नहीं था। इसी के बाद अनिल विज ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देकर साफ संकेत दे दिया कि अब लापरवाही या मिलीभगत किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हर जिले में फैला है अवैध कॉलोनियों का जाल
हरियाणा के लगभग हर जिले, कस्बे और गांव में कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काटे जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। आरोप हैं कि कुछ लोग किसानों से अपेक्षाकृत कम कीमत पर जमीन खरीदकर उसे आवासीय अथवा व्यावसायिक प्लॉटों में बदल देते हैं और कई गुना कीमत पर बेचते हैं। इस पूरे खेल में कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी नियमों को दरकिनार कर दिया जाता है। कई स्थानों पर महीनों तक खुलेआम प्लॉटों की बिक्री होती रहती है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। परिणामस्वरूप आम लोग अपनी जीवनभर की कमाई ऐसे प्लॉटों में निवेश कर देते हैं, जिनकी वैधता बाद में विवादों में घिर जाती है।
सरकारी खजाने पर पड़ता है भारी बोझ
अवैध कॉलोनियों का सबसे बड़ा नुकसान सरकारी खजाने को होता है। नियमानुसार कॉलोनी विकसित करने वाले डेवलपर को सड़क, पार्क, नालियां, बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास स्वयं करना होता है। लेकिन अवैध कॉलोनियों में इन नियमों की अनदेखी की जाती है। बाद में जब इन क्षेत्रों में बड़ी आबादी बस जाती है तो सरकार को जनता की जरूरतों को देखते हुए करोड़ों रुपये खर्च कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी पड़ती हैं। इस प्रकार निजी लाभ कुछ लोगों को मिलता है, जबकि खर्च सरकारी खजाने और अंततः जनता पर पड़ता है।
यमुनानगर का मामला बना बड़ा संकेत
यमुनानगर में सामने आया मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा। जमीन खरीदने से लेकर प्लॉट बेचने और रजिस्ट्रियां करवाने तक का पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता है। यदि इसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच होती है तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यमुनानगर की कार्रवाई भविष्य में प्रदेशव्यापी अभियान का आधार बन सकती है।
क्या कहते हैं नियम?
हरियाणा में दो एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से सीएलयू और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके अलावा सड़कों, पार्कों, सीवरेज, बिजली और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास भी नियमानुसार करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए प्लॉट आरक्षित करना भी कई योजनाओं के तहत अनिवार्य प्रावधान है। लेकिन अवैध कॉलोनाइजर इन नियमों की अनदेखी कर सीधे प्लॉटों की बिक्री शुरू कर देते हैं।
फर्जी प्रॉपर्टी आईडी और रजिस्ट्रियों पर भी सवाल
प्रदेश में लागू प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था का उद्देश्य संपत्तियों का डिजिटल और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना था। लेकिन समय-समय पर ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं कि कुछ मामलों में गलत या विवादित प्रॉपर्टी आईडी बनाकर रजिस्ट्रियों का रास्ता आसान किया जाता है। यदि इस पहलू की गंभीर जांच होती है तो निकाय विभाग, तहसील कार्यालयों और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
कृषि भूमि घटने का असर महंगाई पर भी
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि भूमि पर लगातार बढ़ते निर्माण कार्यों का सीधा प्रभाव खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ता है। एक ओर खेती योग्य भूमि घट रही है, जबकि दूसरी ओर जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। मांग और आपूर्ति के इसी असंतुलन का असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देता है। इसलिए अवैध कॉलोनियों का मुद्दा केवल भूमि उपयोग का नहीं, बल्कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।
प्रदेश स्तर पर बड़े अभियान की संभावना
यमुनानगर में अनिल विज द्वारा दिखाए गए सख्त तेवरों के बाद चर्चा है कि प्रदेशभर में ऐसे मामलों की व्यापक समीक्षा और जांच करवाई जा सकती है। कृषि भूमि पर विकसित अवैध कॉलोनियों, संदिग्ध रजिस्ट्रियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अनिल विज की पहचान ऐसे नेता के रूप में रही है जो शिकायत मिलने पर अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसे में यमुनानगर की कार्रवाई को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि जनता की जमीन, सरकारी राजस्व और कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा सकता है।