भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर बवाल, रानद सुप्रीमो श्रीकान्त त्यागी ने प्रधानमंत्री मोदी से की यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को भंग करने की माँग

punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 07:20 PM (IST)

गुड़गांव ब्यूरो : उत्तर प्रदेश में 14 मार्च 2026 को आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न ने अनायास ही एक व्यापक सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। प्रतियोगी परीक्षाएँ सामान्यतः निष्पक्षता और बौद्धिक परीक्षण का माध्यम मानी जाती हैं, किंतु जब उनमें प्रयुक्त शब्दावली किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करती प्रतीत हो, तो यह केवल एक प्रश्न का विवाद नहीं रह जाता बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और संस्थागत जिम्मेदारी का विषय बन जाता है।

 

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की एस.आई. भर्ती परीक्षा में हिंदी खंड-1 के एक प्रश्न में अभिव्यक्ति “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द” पूछा गया था। इसके उत्तर विकल्पों में “पंडित” शब्द को भी शामिल किया गया, जबकि सामान्यतः इस प्रकार की प्रवृत्ति के लिए “अवसरवादी” शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसी संदर्भ में यह आपत्ति सामने आई कि “पंडित” शब्द, जो भारतीय समाज में ब्राह्मण समाज से जुड़े एक सम्मानजनक संबोधन के रूप में प्रतिष्ठित है, उसे इस प्रकार के संदर्भ में प्रस्तुत करना अनुचित और आपत्तिजनक माना जा सकता है।

 

इसी मुद्दे को गंभीर बताते हुए राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकान्त त्यागी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि “पंडित” शब्द केवल एक जातिगत पहचान नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, विद्वता, ज्योतिष, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक संस्कारों का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में किसी प्रतियोगी परीक्षा में इस शब्द को नकारात्मक अर्थ वाले विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना ब्राह्मण समाज की भावनाओं को आहत करने वाला प्रतीत होता है।

 

रानद सुप्रीमो श्रीकान्त त्यागी का यह भी कहना है कि देश में लगभग 17.50% ब्राह्मण समाज की आबादी है और ऐसे में इस प्रकार की शब्दावली अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकती है। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाएँ केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि वे शासन व्यवस्था की निष्पक्षता और संवेदनशीलता का भी प्रतीक होती हैं। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और उसके सामाजिक अर्थों के प्रति विशेष सावधानी अपेक्षित है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित प्रश्न को तैयार करने और उसे प्रश्नपत्र में शामिल करने की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की लापरवाही या दुर्भावना सामने आती है तो उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड व पेपर सेट करने वाले/प्रश्न तैयार करने वाले संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर व दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएँ दोबारा न हों।


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Content Editor

Gaurav Tiwari

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