पानीपत में हरियाणा-यू.पी. सीमा पर किए गए 108 पिलर स्थापित, जानिए क्यों
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 08:50 AM (IST)
पानीपत: पानीपत में हरियाणा-यू.पी. बॉर्डर पर यमुना नदी के भीतर सीमा निर्धारण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमा विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से तटबंध के अंदर बड़े पिलर लगाए जा रहे हैं, जिनमें से अब तक 108 पिलर स्थापित किए जा चुके हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा रेखा को स्पष्ट करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पी डब्ल्यू, डी.) द्वारा गांव राणा माजरा से गांव राकसेड़ा तक करीब 46 किलोमीटर क्षेत्र में कुल 404 पिलर लगाए जाने हैं। इनमें 202 ओड नंबर के पिलर हरियाणा सरकार और 202 इंचन नंबर के पिलर यूपी सरकार द्वारा लगाए जाएंगे।
पी.डब्ल्यू.डी. के पानीपत कार्यालय ने ओड नंबर के 202 पिलर लगाने के लिए लगभग 5.12 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। ठेकेदार ने अब तक हरियाणा हिस्से के 202 में से 108 पिलर लगा दिए हैं, जबकि शेष पिलरों का कार्य प्रगति पर है। यह कार्य पिछले वर्ष 1 जून से शुरू हुआ था, लेकिन बरसात के दौरान यमुना में
जलस्तर बढ़ने और कई स्थानों पर किसानों की ईख की फसल खड़ी होने के कारण काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। यमुना तटबंध के भीतर खेती को लेकर पानीपत और यू.पी. के किसानों के बीच लंबे समय से फसल की बुवाई और कटाई के दौरान विवाद होते रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि पिलर स्थापित होने के बाद दोनों राज्यों की सीमा स्पष्ट हो जाएगी और किसानों के बीच होने वाले झगड़ों पर लगाम लगेगी।
के पी. डब्ल्यू डी एक्सईएन सक्ति पान्नु के अनुसार, सीमा रेखा पर 108 पिलर लगाए जा चुके हैं और बाकी कार्य तेजी से जारी है। विभागीय अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं तथा मौके की देखरेख की जा रही है। होने से पिलर लगाने के काम में पर जेई कुलबीर द्वारा कार्य अब ईख की कटाई तेज भी गति आ गई है।
हर साल बदल जाती है सीमा
यमुना नदी हरियाण और उत्तर प्रदेश के बीच विभाजन का काम करती है। वर्ष के दौरान यमुना नदी का जल स्तर हढ़ने से नदी की सारा का प्रवाह बदल जाता है। इसके चलते हर साल कभी हरियाणा की जमीन उत्तर प्रदेश के हिस्से की तरफ चली जाती है, तो कभी उत्तर प्रदेश की जमीन हरियाणा की तरक आ जाती है।
इस जमीन पर कब्जे और फसाल की लेकर हर साल विवाद रहता है। कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है। मामले भी दर्ज होते रहते हैं। कई बार दोनों राज्यो के राजस्व विभाग के अधिकारी पैमाइश कर चुके हैं लेकिन स्थानीय समाकन नहीं निकल सका।
1970 के दशक में आए दीक्षित अवार्ड के आचार परयमुना किनारे दोनों राज्यों की सीमा को निर्धारित करने के लिए पिलर खड़े किए गए थे, लेकिन यह पानी के तेल बहाव से बह गए थे। इस वजह से किर से सीमा विवाद खड़ा हो गया था।
इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए सर्वे आफ इंडिया द्वारा सर्वे कराया गया था। इसकी रिपोर्ट दोनों राज्यों के अधिकारियों को दी गई ।इसी रिपोर्ट के आवार पर अब यमुना ती स्वच इंटर स्टेट बार्डर पर पिलर खड़े किए जा रहे है।