दो वक्त की रोटी के लाले पड़े फिर भी नहीं हारी हिम्मत, निशा ने हासिल किया ओलंपिक का टिकट
punjabkesari.in Monday, Jun 21, 2021 - 09:49 PM (IST)
सोनीपत (पवन राठी): हरियाणा के खिलाड़ियों का ओलंपिक में दबदबा रहा है। कुश्ती के बाद अब ओलंपिक में जाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में नौ खिलाड़ी हरियाणा की हैं, जिनमें से तीन खिलाड़ी सोनीपत जिले की रहने वाली हैं। आज हम आपको एक ऐसी महिला हॉकी खिलाड़ी के परिवार से रूबरू कराने जा रहे हैं जो कि एक साधारण सेपरिवार है लेकिन अपने खेल के दम पर अब भारतीय महिला हॉकी टीम में स्थान बनाया और अब टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेगी।

सोनीपत के कालूपुर गांव की रहने वाली निशा नाम हॉकी खिलाड़ी का चयन अब ओलंपिक में जाने वाली भारतीय महिला टीम में हो गया है। इस उपलब्धि के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। गांव कालूपुर 25 गज के मकान में निशा का परिवार रहता है और निशा अपने चार भाइयों बहनों में सबसे छोटी है। उसकी तीन बहने हैं और एक भाई है। 2016 में निशा के पिता को पैरालाइज अटैक आ गया था, जिसके बाद परिवार के सामने दो वक्त की रोटी खाने तक के पैसे नहीं थे लेकिन परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और निशा के हौसले को कायम रखा और आज उसी हौसले के दम पर निशा ने ओलंपिक में जाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाई।

निशा के पिता स्वराज और माहरूम ने बताया कि वे सोनीपत के एक छोटे से गांव कालू पर में 25 गज के मकान में रहते हैं लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को कभी भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया। आज जब उसका भारतीय महिला हॉकी टीम जो कि ओलंपिक में जाएगी उसमें चयन हुआ है तो उनको बहुत खुशी हो रही है। उनका सपना था कि उनकी बेटी उनको टीवी पर खेलती हुई नजर आए और आज उनका सपना पूरा होता हुआ नजर आ रहा है। निशा के पिता स्वराज ने कहा कि मई 2016 में जब उनको अटैक आया तो उनकी उम्मीदें टूट गई थी की बेटी को कैसे खिलाएंगे लेकिन कोच प्रीतम सिवाच ने उनको हौसला दिया और आज उसी हौसले की बदौलत उनकी बेटी ओलंपिक में खेलने जा रही है और हमें उम्मीद है अबकी बार हमारी भारतीय महिला हॉकी टीम गोल्ड मेडल जीतकर लाएगी।
निशा की कोच प्रीतम सिवाच ने बताया कि निशा मुसलमान समुदाय से ताल्लुक रखती है और वह जब मैदान में होती है अपने शरीर को ढककर खेलती है मैंने उसको कई बार कहा है कि वह रिलैक्स होकर खेले। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह मैदान पर खेल सके लेकिन उसकी हिम्मत में उसे खेलने का अवसर दिया और आज वह देश का नाम रोशन कर रही है।
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