प्रेरक, तर्कपूर्ण विचारों एवं साहित्यक रचनाओं के लिए अलग पहचान रखती हैं आई.ए.एस. डा. सुमिता मिश्रा!
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 08:19 PM (IST)
चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : हरियाणा कॉडर की 1990 बैच की आई.ए.एस. अधिकारी डा. सुमिता मिश्रा जहां प्रशासनिक कौशलता के चलते अपनी एक खास पहचान रखती हैं तो वहीं साहित्यिक रचनाओं के साथ ही प्रेरक विचारों के लिए भी प्रख्यात हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं। अब तक उनके पांच काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। वे फेसबुक और एक्स हैंडल दोनों पर खूब सक्रिय रहती हैं। अपने प्रशासनिक कामकाज से जुड़े फोटो एवं मुद्दों को पोस्ट करती हैं तो वीडियो, रील्स एवं प्रेरक विचारों के जरिए भी दूसरों को प्रेरित करती हैं।
विशेष पहलू यह है कि वे एक या दो वाक्यों में सामाजिक जीवन से जुड़े हुए पहलूओं को बड़े ही व्यंग्यात्मक व तर्कपूर्ण अंदाज में पोस्ट करती हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण को लेकर लिखा ‘क्रोध के समय मौन और समस्या के समय मुस्कान सब से बड़ी ताकत होती है।’ ऐसे ही एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ‘कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जो बस अपने तक ही रह जाते हैं। दूसरे को समझाना या बताना मुमकिन ही नहीं हो पाता।’ इसी तरह से लिखा कि ‘जिसके हिस्से विष आया हो, उसके हिस्से शिव भी आएंंगे ही।’
महिलाओं के प्रति सामाजिक सोच को लेकर डा. सुमिता मिश्रा ने लिखा कि ‘चट्टानों से लड़ती नारी असली सम्मान और प्रेम की हकदार थी, पर कवियों ने संघर्ष छोड़ श्रृंगार चुन लिया, क्योंकि लड़ती महिला असहज लगती है, सजी-संवरी औरत स्वीकार्य।’ इन दिनों चल रही वार्षिक परीक्षाओं के संदर्भ में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते नंबरों की रेस को लेकर उन्होंने लिखा कि ‘परीक्षा में नंबर महत्वपूर्ण लगते हैं, पर जिंदगी में प्रयास, सीख, धैर्य और अनुकूलन क्षमता ज़्यादा मायने रखती है। इसके अलावा उन्होंने लिखा कि ‘जीवन एक अनोखी परीक्षा है, जिसका सिलेबस पहले नहीं बताया जाता, फिर भी हर किसी को पास होने की उम्मीद रहती है’।
35 वर्षों की सेवा में दो दर्जन विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर किया है काम
अपने अब तक के 35 वर्ष के कार्यकाल के दौरान डा. सुमिता मिश्रा दो दर्जन से अधिक विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। उनकी पहली नियुक्ति 18 सितंबर 1991 को फरीदाबाद में प्रशिक्षणकत्र्ता के रूप में हुईं और इसके बाद वे नारायणगढ़ की उपमंडलाधीश बनीं। वर्तमान में सुमिता मिश्रा अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं और वित्तायुक्त हैं। इसके अलावा उनके पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष विभाग भी हैं। वे गृह सचिव भी रह चुकी हैं।
अपने अब तक के सेवाकाल में कुरुक्षेत्र में अतिरिक्त उपायुक्त, रेवाड़ी में उपायुक्त, फरीदाबाद नगर निगम में आयुक्त के रूप में काम कर चुकी हैं। सुमिता मिश्रा कृषि, तकनीकी शिक्षा, मत्स्य, सिंचाई, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, सामाजिक अधिकारिता, बिजली निगम जैसे विभागों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। 30 जनवरी 1967 को लखनऊ में जन्मीं सुमिता मिश्रा ने अपनी आरंभिक शिक्षा लोरेंटो कान्वेंट स्कूल से पूरी की।
इसके बाद उन्होंने लॉ माॢटनियर कालेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 2015 में सुमिता मिश्रा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र विषय में पी.एच.डी. की। 2018 से 2021 तक डा. सुमिता मिश्रा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में वरिष्ठ सलाहकार के पद पर भी काम कर चुकी हैं।
ऑप्रेशन सिंदूर में भी निभाई थी खास भूमिका
ऑप्रेशन सिंदूर के दौरान डा. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव के रूप में अपने जिम्मेदारियों का बहुत ही अच्छे ढंग से निर्वाह किया था। उन्होंने इस ऑप्रेशन के बाद राज्य की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी। डा. मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद शहरों में आपात स्थिति से निपटने के लिए ‘ऑपरेशन अभ्यास’ की बारीकियों से देखरेख की। उन्होंने पंचकूला में नियंत्रण कक्ष से स्वयं इन अभ्यासों की निगरानी की थी। डा. मिश्रा ने राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस, स्वास्थ्य और अग्निशमन सेवा विभागों के सभी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी थी।
खास बात यह है कि पर्यटन में बेहतरीन प्रशासनिक काम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गंतव्य प्रबंधन पुरस्कार, साहित्य और सार्वजनिक सेवा में योगदान के लिए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कार, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा कृषि पोर्टल के कार्यान्वयन का नेतृत्व करने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से राज्यस्तरीय फ्लैगशिप पुरस्कार, कृषि में प्रशासनिक कार्यों के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जा चुका है। सुमिता मिश्रा के प्रयासों के बाद हरियाणा जुलाई 2023 में क्रेच नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना था। तब सुमिता मिश्रा काफी चर्चा में आई थीं।
डा. सुमिता मिश्रा की लेखन में रुचि है और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी तमाम जिम्मेदारियों को निभाते हुए वह अब कई किताबें लिख चुकी हैं। इनमें ए लाइफ ऑफ लाइट, ‘जरा सी धूप’, ‘वक्त के उजाले में’ ‘पैट्रीकोर’ व ‘लम्हों की शबनम’ किताबें प्रमुख हैं। डा. सुमिता मिश्रा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह फेसबुक और इंस्टाग्राम और एक्स प्लेटफॉर्म में अपने लेखन को साझा करती हैं। फेसबुक पर उनके 10 लाख जबकि एक्स हैंडल पर 1 लाख 92 हजार फॉलोअर्स हैं। उन्होंने चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की स्थापना की। वह चंडीगढ़ के वार्षिक साहित्यिक उत्सव लिटरेटी के उत्साही महोत्सव निदेशक के रूप में भी कार्य करती हैं। यह लेक क्लब में 2013 में शुरू हुआ था। वह अपने लेखन के लिए कई अवॉर्ड भी हासिल कर चुकी हैं।
अगले साल प्रदेश में जनगणना के काम को सिरे चढ़ाने की भी है जिम्मेदारी
खास बात यह है कि देश में 2011 के बाद अगले साल से जनगणना भी होनी है। किसी भी देश व प्रदेश के लिए जनगणना सबसे महत्वपूर्ण होती है। विशेष बात यह है कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश में जनगणना के कार्य को सिरे चढ़ाने की जिम्मेदारी डा. सुमिता मिश्रा को दी है और उन्हें जनगणना 2027 का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इस सिलसिले में डा. सुमिता मिश्रा का कहना है कि हरियाणा सरकार ने राज्य में जनगणना-2027 के अंतर्गत हाउस-लिस्टिंग कार्य की समय-सारिणी अधिसूचित कर दी है।
यह कार्य 1 मई से 30 मई, 2026 तक 30 दिनों की अवधि में संपन्न किया जाएगा। इसके साथ ही नागरिकों को 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। यह अधिसूचना जनगणना अधिनियम, 1948 तथा उससे संबंधित जनगणना नियमों के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है। इसी तरह से उन्होंने अपने ऑफिशयल एक्स हैंडल पर जानकारी देते हुए लिखा कि ‘हरियाणा दुनिया के सबसे बड़े सांख्यिकीय अभियान—भारत की डिजिटल जनगणना 2027 में अग्रणी भूमिका निभाने को पूरी ताकत से तैयार। 50 हजार कर्मचारी मोबाइल एप्प से डाटा अपलोड करेंगे।
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