अब पर्दे में करना होगा निर्माण, धूल प्रदूषण रोकने के लिए MCG ने जारी किए आदेश

punjabkesari.in Wednesday, Jun 24, 2026 - 11:14 AM (IST)

गुड़गांव,(ब्यूरो): नगर निगम ने शहर में बढ़ते धूल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश के तहत नगर निगम क्षेत्र में स्थित सभी निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत, तोड़फोड़ एवं खुदाई स्थलों पर कॉरुगेटेड जीआई (गैल्वेनाइज्ड आयरन) अथवा धातु शीट की बैरिकेडिंग लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

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धूल प्रदूषण पर नियंत्रण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा प्राथमिकता
नगर निगम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों से निकलने वाली धूल गुरुग्राम और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। बिना बैरिकेडिंग वाले निर्माण स्थलों से धूल का अनियंत्रित प्रसार होता है, जिससे पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
 

सभी निर्माण एवं खुदाई स्थलों पर होगी अनिवार्य बैरिकेडिंग
आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति, बिल्डर, डेवलपर, ठेकेदार अथवा एजेंसी निर्माण या ध्वस्तीकरण कार्य तब तक प्रारंभ या जारी नहीं रख सकेगी, जब तक पूरे स्थल की परिधि को कॉरुगेटेड जीआई/मेटल शीट बैरिकेडिंग से पूरी तरह सुरक्षित न किया जाए। बैरिकेडिंग कार्य शुरू होने से पहले स्थापित करनी होगी और निर्माण अवधि के दौरान उसे सुरक्षित एवं व्यवस्थित स्थिति में बनाए रखना होगा।


बैरिकेडिंग के लिए निर्धारित किए गए तकनीकी मानक
नगर निगम ने बैरिकेडिंग के लिए विस्तृत मानक भी निर्धारित किए हैं। इसके तहत न्यूनतम 0.50 मिमी मोटाई की जीआई या रंगीन धातु शीट का उपयोग किया जाएगा। 500 वर्गमीटर या उससे बड़े प्लॉटों एवं सभी तोड़फोड़ कार्यों के लिए कम से कम 3 मीटर (10 फीट) ऊंची बैरिकेडिंग अनिवार्य होगी, जबकि अन्य स्थलों के लिए न्यूनतम 2.4 मीटर (8 फीट) ऊंचाई निर्धारित की गई है। स्कूल, अस्पताल अथवा व्यस्त सड़कों के समीप स्थित स्थलों पर 3.6 मीटर (12 फीट) या उससे अधिक ऊंचाई की बैरिकेडिंग करनी होगी।
 

फुल-हाइट डस्ट स्क्रीनिंग भी होगी अनिवार्य
निर्माणाधीन अथवा डिमोलिशन वाले भवनों पर बैरिकेडिंग के साथ-साथ पूरी ऊंचाई तक डस्ट स्क्रीनिंग (ग्रीन नेट/डस्ट स्क्रीन) लगाना भी अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थल से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करना और आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषण से बचाना है।
 

निर्माण स्थल पर प्रदर्शित करनी होगी परियोजना की जानकारी
आदेश के अनुसार प्रत्येक निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग के साथ एक डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा, जिसमें भवन स्वामी, बिल्डर, परियोजना का विवरण, स्वीकृति संख्या, जिम्मेदार अधिकारी का संपर्क विवरण तथा शिकायत हेल्पलाइन की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
 

निगरानी और प्रवर्तन के लिए बनाई जाएगी विशेष व्यवस्था
आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नगर निगम स्तर पर डस्ट कंट्रोल एवं प्रवर्तन सेल गठित किया जाएगा। अतिरिक्त निगमायुक्त को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा, जबकि संबंधित जोन के संयुक्त आयुक्त प्रवर्तन अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता एवं स्वच्छता निरीक्षक नियमित निरीक्षण कर अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
 

उल्लंघन पर काम रुकवाने से लेकर सीलिंग तक की कार्रवाई
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने पर निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पर्यावरण क्षतिपूर्ति, जुर्माना, जल एवं बिजली कनेक्शन काटने, साइट सीलिंग, ब्लैकलिस्टिंग तथा अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। गंभीर मामलों में सीएक्यूएम, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों के माध्यम से भी कार्रवाई की जाएगी।

15 दिनों के भीतर करना होगा पूर्ण अनुपालन
नगर निगम ने सभी चल रहे निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों को आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर निर्धारित मानकों के अनुरूप बैरिकेडिंग एवं धूल नियंत्रण उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि के बाद उल्लंघन पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त गुरुग्राम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम- निगमायुक्त
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि यह आदेश गुरुग्राम में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने, नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने तथा निर्माण गतिविधियों को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी बिल्डरों, डेवलपर्स, ठेकेदारों और नागरिकों से आदेश का पूर्ण पालन करने की अपील की।


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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