मानव तस्करी, दुष्कर्म के मामलों में बढ़ोतरी का  एक बड़ा कारण मोबाइल :स्वामी संपूर्णानंद

punjabkesari.in Sunday, Mar 13, 2022 - 03:20 PM (IST)

चंडीगढ( चंद्रशेखर धरणी): लंबे समय से समाज की कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे आर्य समाज से जुड़े स्वामी संपूर्णानंद चंडीगढ़ पहुंचे तो उनसे विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के प्रयोग के लिए अगर सही उदाहरण दिया जाए तो यह है कि अगर सड़क का प्रयोग बुद्धिमान करें तो वह अपने मार्ग पर पहुंचता है, अगर सड़क का प्रयोग शराब पीकर किया जाए तो वह हरिद्वार पहुंचता है। इसी प्रकार से आज टेक्नोलॉजी का सही प्रयोग हमारे बच्चों समाज और देश को सर्वश्रेष्ठ बनाने में कारगर साबित हो सकता है, लेकिन ऐसा बहुत कम हो रहा है। आज टेक्नोलॉजी मानव तस्करी का माध्यम बन रही है। छोटे- छोटे बालक-बालिकाएं गलत चीजों में जिज्ञासा रखने लगे हैं। जिसे लेकर सरकार माता-पिता और अध्यापकों द्वारा महत्वपूर्ण रोल अदा किया जाना बेहद जरूरी हो गया है। सरकार को तुरंत प्रभाव से आ रहे रेवेन्यू पर ध्यान ना देते हुए गंदी पोर्नसाइट्स पर रोक लगानी चाहिए। माता-पिता खासतौर पर मां को अपने बच्चों के चाल-चलन पर बेहद ध्यान देना चाहिए। माता-पिता से अच्छा बच्चे के लिए कोई दोस्त नहीं हो सकता। अगर माता-पिता दोस्त हैं तो बच्चे को बाहर की फ्रेंडशिप की कोई आवश्यकता नहीं होती। इस तरह से मां अपनी बालिका को  सही दिशा दे सकती है। बाहर की फ्रेंडशिप की आवश्यकता उन्हीं को पड़ती है जिनकी फ्रेंडशिप अपने माता-पिता से नहीं होती। जिसका प्यार का घड़ा घर से भर जाता है, उसे बाहर के फ्रॉड प्यार का लाली पॉप आकर्षित नहीं कर सकता। साथ ही साथ बच्चे को फोन दें तो समय-समय पर प्रेम पूर्वक यह भी चेक करते रहना चाहिए कि आखिर उनका बच्चा फोन में क्या देखता है। बच्चे की चैटिंग, रिकॉर्डिंग और कॉल डिटेल पर भी बड़ों को नजर रखनी चाहिए। इस कार्य में अध्यापकों और समाज की भी जिम्मेदारी विशेष स्थान रखती है। अध्यापकों ने बेशक शिक्षा के लिए बच्चों के हाथ में मोबाइल एक जरूरत बना दिया हो लेकिन मोबाइल के अच्छे और बुरे इस्तेमाल की जानकारी देना भी अध्यापकों की जिम्मेदारी बनती है। इस प्रकार से समाज सुधार के इस कार्य में सरकार, माता-पिता और अध्यापकों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

साधनों से नहीं साधना से मिलती है वास्तविक और आंतरिक खुशी
स्वामी ने कहा कि दुनिया में साधना और साधन दो प्रकार के सुख होते हैं। साधन का आकर्षण और सुख समय के साथ खत्म होता जाता है। लेकिन साधना का सुख लगातार बढ़ता जाता है। यानि भोग का सुख घटता है और योग का सुख बढ़ता है। जिसकी व्याख्या स्वयं वेदों में भी लिखी हुई है। आज से 70-80 वर्ष पूर्व कम साधन होते हुए भी सुख ज्यादा था और आज साधन अधिक होने के बावजूद भी सुख कम है। स्वामी ने कहा योग में राजनीति का आना भी अति आवश्यक है। जबकि राजनीति में योग बिल्कुल नहीं आना चाहिए। यदि राजा वास्तव में योगी है तो उससे अधिक भला प्रजा और देश का कोई नहीं कर सकता। प्रजा को योगी ही सुखी कर सकता है। क्योंकि भोगी के तो अपने शौक ही पूरे नहीं होते।


 

धर्म और राजनीति की बहस के बीच बेचारी गऊ फंसी है
बता दे, स्वामी संपूर्णानंद लगातार गौशालाओं का संरक्षण करते हुए गौ रक्षा के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने इस प्रश्न पर कहा कि आज बेसहारा गउएं और नंदी सड़कों पर घूमने को मजबूर हैं। यह देश का दुर्भाग्य है। सरकार गौशालाओं को अनुदान भी दे रही है और गौ हत्या पर कडे कानून भी बनाए गए हैं। सरकार की यह एक अच्छी पहल बेशक है, लेकिन अगर घाव पर आधे टांके लगाकर आधा घाव खुला छोड़ दिया जाए तो उसका कोई लाभ नहीं होगा। गौ रक्षा कोई धार्मिक मुद्दा नहीं है। यह दुर्भाग्य है कि धर्म और राजनीति की बहस के बीच बेचारी गऊ फंसी हुई है। जबकि गाय का नाता हमारे जीवन से है। गाय हमारे जीवन का एक विकल्प है। छोटे बच्चे की मां मर जाने पर गाय का दूध पिला कर बच्चा पाला जाता है। क्योंकि सभी प्राणियों में सबसे गुणकारी गाय का दूध होता है। इसीलिए गाय को माता बोला जाता है। एक बड़ी रिसर्च में यह साबित हुआ है कि डिप्रेशन के दौरान गाय से लिपटने पर गाय की श्वास मरीज पर पढ़ने से डिप्रेशन की बीमारी दूर हो जाती है। गाय जब प्यार करती है तो कई रोग दूर होते हैं। गाय ना तो हिंदू की है, ना मुस्लिम, ना सिख की है, गाय पूरे मानव जाति की है। जो इसका अमृत रूपी दूध पिएगा वह लंबा जिएगा।

किसान के खूंटे पर बंधी बुजुर्ग गाय की पेंशन देने की स्कीम बनाए सरकार
स्वामी ने कहा कि गाय के दूध बंद कर देने पर उसे सड़क पर व मां-बाप बूढ़े हो जाएं तो उन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया जाता है, यह समाज की नैतिकता का भयंकर पतन है। हरियाणा सरकार अगर गौशालाओं को अनुदान देने की बजाय अगर किसान के खूंटे पर बंधी बुजुर्ग गाय जिस प्रकार से वृद्ध व्यक्ति के लिए सोशल सिक्योरिटी के रूप में पेंशन की व्यवस्था की गई है को भी दे तो सड़क पर घूमने वाली गाय सड़क पर दिखने बंद हो जाएंगी। लोग खूंटे पर बांध कर फोटो खिंचवाएंगे और सरकार से पेंशन लेकर गाय की सेवा करेंगे। जिससे हर साल इन पशुओं के कारण होने वाले एक्सीडेंट के केस भी खत्म हो जाएंगे। आज विदेशों में भारत देश की किरकिरी हो रही है कि गाय को मां कहने वाले देश में गाय सड़कों पर घूमती है।

स्वामी ने बताया कि जो परिवार भारतीय नस्ल की गाय का दूध पीना शुरू कर दे तो घर में मेडिकल बजट शून्य हो जाएगा। भारतीय नस्ल की गायों का रोग नाशक ए2 मिल्क हमारे जीवन को निरोगी बना सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने घर पर भारतीय नस्ल की गाय बांध उसका दूध - घी - मक्खन इत्यादि का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर उसके घर पर जगह नहीं तो उसे किसी को ग्वाले के पास बंधवा दूध परिवार को पिलाना चाहिए। अगर समाज ऐसी सोच रख ले तो गाय पलनी शुरू हो जाएंगी और सड़कों पर घूमने वाली गाय खूंटे पर आ जाएंगी। सरकार को अनुदान देने के साथ-साथ एक अथॉरिटी का निर्माण करना चाहिए जो दी गई सरकारी सहायता और दान सही ढंग से गांय तक पहुंच रहा है या नहीं इसका निरीक्षण करती रहे।

स्वामी ने कहा कि आज देश के 80 फ़ीसदी युवा स्ट्रेस दूर करने के लिए नशे या फिर नैतिक अनैतिक साधन अपनाता है। आज सारा संसार दर्द नाशक दवाइयां खा रहा है। आज विश्व की सबसे इफेक्टिव पेन किलर अफीम से बनने वाली मोरफिन है। लेकिन देश के फौजी माइनस 52 डिग्री तापमान पर गोली लगने या पैर इत्यादि टूटने के बावजूद भी आगे बढ़ते चले जाते हैं। क्योंकि उनका ब्रेन एंडडॉरफीन हार्मोन छोड़ता है। उसका मात्र कारण वह लगातार योग, एक्सरसाइज करते हैं। इसलिए छोटी-छोटी दिक्कतों में दवाइयां खाने की बजाय योग- प्राणायाम और सुबह की दौड़ इत्यादि को अपनाने से अपने जीवन को सुखी बना सकते हैं। इसके साथ जब किसी अन्य व्यक्ति को हम सुख देते हैं, वफादारी निभाते हैं और दूसरे की खुशी में खुश होते हैं, तो हमारा दिमाग सरटनटीन हार्मोन छोड़ता है। वही जब उदार हृदय दिखाते हुए किसी को सुख देते हैं। समाज की सेवा और परोपकार करते हैं तो हमारा ब्रेन डोपामाइन हार्मोन छोड़ता है। इस प्रकार से ऐसे काम करें कि यह तीनों हार्मोन हमारा ब्रेन छोड़े और हम संसार के सबसे सुखी व्यक्ति बन पाए।

 

 


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Content Writer

Isha

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