पीजीएस कंपनी की जब्त संपत्ति को फर्जी दस्तावेज पर बेचा, आरोपी बेंगलुरु से गिरफ्तार

punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 09:21 PM (IST)

गुड़गांव, (ब्यूरो): गुरुग्राम पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के नियंत्रणाधीन पीजीएस कंपनी की जब्त संपत्तियों को जाली दस्तावेजों के आधार पर बेचने वाले आरोपी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया। आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र और जाली बोर्ड रेजोल्यूशन के जरिए करोड़ों की हेराफेरी को अंजाम दिया था। पीजीएफ लिमिटेड की संपत्ति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष समिति की देखरेख में थी और इसे बेचने पर रोक लगी हुई थी।

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नायब तहसीलदार द्वारा 14 मार्च 2024 को दी गई शिकायत के अनुसार आरोपियों ने समिति की अनुमति के बिना ही फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर इस कीमती प्लॉट की अवैध रूप से रजिस्ट्री करवा ली। इस जालसाजी के जरिए सरकारी आदेशों की अवहेलना कर अवैध लाभ कमाया गया। आर्थिक अपराध शाखा-एक की टीम ने तकनीकी जांच के बाद इस मामले में संलिप्त एक मुख्य आरोपी को बेंगलुरु (कर्नाटक) से गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान राजेंद्र सिंह निवासी नेपाल के रूप में हुई। आरोपी गार्ड की नौकरी करता था। आरोपी ने खुद को रविंद्र प्रसाद बताकर फर्जी दस्तावेज बनवाए थे।   

 

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अपने साथियों के साथ मिलकर रविंद्रर प्रसाद के नाम से जाली आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाए। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने पीजीएफ कंपनी के नाम से एक करंट बैंक खाता खुलवाया और खुद को उसका प्रोपराइटर घोषित कर दिया। प्लॉट को एक डीलर के माध्यम से बेचने के बाद, जो मोटी रकम मिली, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी फर्जी खाते में जमा कराया गया। बाद में आरोपियों ने चेक के जरिए यह पैसा निकाल लिया।

 

 आरोपी पहले दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था। उसने स्वीकार किया कि अन्य के कहने पर उसने यह बैंक खाता खुलवाया था, जिसके बदले उसे पांच लाख रुपये मिले थे। इस मामले में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस अब इस मामले में अन्य आरोपी और डीलर्स की तलाश कर रही है जिन्होंने जाली बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किए। वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच की जा रही है ताकि गबन की गई पूरी राशि का पता लगाया जा सके।

 


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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