पुलिस का कारनामा: एफआईआर रद्द करने के लिए 1995 में मरे हुए व्यक्ति को बनाया गवाह

11/13/2019 10:05:56 PM

पानीपत (अनिल कुमार): आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह के घर में चोरी व ताला तोडऩे के मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप लगाने वाले आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह महेन्द्र चावला ही हैंं, उन्होंने चोरी के मामले में 1995 में मरे हुए व्यक्ति को गवाह बनाकर एफआईआर रद्द करने वाले डीएसपी सतीश वत्स, एसएचओ सूरजभान व दो अन्य के विरुद्ध महेन्द्र चावला ने एसपी पानीपत को शिकायत पत्र दिया है। 

महेंद्र चावला ने बताया कि 19.4.19 को उसके सुरक्षाकर्मी हवलदार पुनीत द्वारा चावला की गैरहाजिरी में घर का ताला तोड़ा गया था, जिसकी थाना सनोली में एफआईआर 68/2019 दर्ज है। चावला का आरोप है कि पानीपत पुलिस के इन सभी अधिकारीयों ने दिए गए सबूतों को गायब कर दिया और 1995 में मरे हुए व्यक्ति सत्यनारायण पुत्र जीतराम को गवाह बनाया। फिर एफआईआर को रद्द कर करके केस बंद कर दिया था।

इसी सम्बन्ध में महेंद्र चावला ने 12 नवंबर को एसपी पानीपत को मिलकर डीएसपी सतीश वत्स, एसएचओ सूरजभान, एएसआई श्रीभगवान व एचसी राजेंद्र सिंह व अन्य के विरुद्ध शिकायत दी और तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए सुरक्षा को पुख्ता करने की अपील की।

चावला का कहना है कि उसके सुरक्षाकर्मी पानीपत पुलिस के हवलदार पुनीत ने आसाराम बापू के गुंडों से मिलीभगत करके डीएसपी सतीश वत्स, एसएचओ सूरजभान, एएसआई श्रीभगवान व एचसी राजेंद्र सिंह के निर्देशानुसार गांव सनोली के स्थाई निवासियों सरपंच प्रियंका शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, राजेंद्र शर्मा, संजय त्यागी व अन्य लोगों के साथ मिलकर षड्यंत्र पूर्वक दिनांक 19.4.19 को पहले तो पुनीत को पानीपत से सुरक्षा छोड़कर भाग गया, उसके बाद महेंद्र चावला की गैरहाजिरी में चावला के घर में गेट फांदकर घुसा और ताला तोड़कर सामान चोरी किया। पुनीत केवल चोरी के उद्देश्य से घर में नहीं घुसा था, बल्कि पुनीत का उद्देश्य महेंद्र चावला के घर में कोई भी गैर कानूनी सामान / हथियार/ नशीला पदार्थ रखकर महेंद्र चावला को फंसाना था।

चावला ने कहा कि गांव सनोली खुर्द के पूर्व सरपंच सुरेन्द्र शर्मा, संजय त्यागी, राजेंद्र शर्मा आदि लोग पिछले काफी समय से मेरे ऊपर आसाराम से समझौते का दबाव बना रहे थे, करोड़ों रूपए का लालच भी दिया और हमलावरों का सहयोग करके मेरे ऊपर जानलेवा हमला भी करवाया परन्तु सफल न हुए। जिसके बाद सुरेन्द्र शर्मा ने अपनी पुत्रवधू प्रियंका शर्मा से अनेकों झूठी शिकायतें भी दिलवाई परन्तु चावला समझौते के लिए राजी नहीं हुआ।

आरोपों के मुताबिक, आसाराम व नारायण साईं को बचाने के उद्देश्य से ही डीएसपी सतीश वत्स महेंद्र चावला पर हुए हमले सम्बन्धी एफआईआर के दस्तावेज भी दबा कर बैठे हुए हैं। सूचना आयोग के आदेश के बावजूद भी सतीश वत्स उन दस्तावेजों को देने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।

चावला ने आरोप लगाए कि आसाराम के गुर्गों ने पानीपत पुलिस के डीएसपी सतीश वत्स, एएसआई सनोली सूरजभान को मोटी रिश्वत देकर चावला को झूठे केसों में फंसाने की सुपारी दी। जिसके बाद डीएसपी सतीश वत्स व एएसआई सूरजभान ने जानबूझकर चावला की सुरक्षा को कमजोर करना शुरू कर दिया। 

चावला ने डीजीपी पानीपत को मिलकर डीएसपी सतीश वत्स व् एएसआई सूरजभान के विरुद्ध शिकायत दी, इनके विरुद्ध करवाई की मांग की। इसी रंजिश के चलते व आसाराम की तरफ से आई मोटी रिश्वत के कारण इन दोनों अधिकारियों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक घर में कोई भी गैरकानूनी सामान रखने के उद्देश्य से पहले तो पुनीत से घर का ताला तुड़वाया फिर मरे हुए व्यक्ति को गवाह बनाकर सभी आरोपिओं को बचाने के उद्देश्य से केस को रद्द कर दिया।

महेंद्र चावला का कहना है कि पानीपत पुलिस के गवाह सतनारायण पुत्र जीतराम की मृत्यु वर्ष 1995 में हो चुकी है तथा अन्य जिन तीन लोगों को पुलिस ने गवाह बनाया है। उन नामों से गांव में कोई व्यक्ति रहता ही नहीं है। चावला ने कहा उपरोक्त सभी लोग यह शिकायत वापिस लेने का दबाव बनाने के उद्देश्य से कभी भी मेरे ऊपर जानलेवा हमला करवा सकते हैं,या अन्य किसी भी झूठे केस में मुझे फंसा सकते हैं, इसलिए मुझे केंद्रीय सुरक्षा दी जाए।


Shivam

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