सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हंसी को राहत, नूंह अदालत से मिली जमानत, पुलिस अफसरों को कारण बताओ नोटिस
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 12:39 PM (IST)
नूंह (अनिल मोहनिया) : नूंह जिले की अदालत ने फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हंसीरा उर्फ हंसी को नियमित जमानत दे दी है। यह मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।
अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाते हुए पुन्हाना सिटी थाना प्रभारी राजेश कुमार और डीएसपी पुन्हाना जितेंद्र कुमार राणा को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शशि चौहान ने की, जिन्होंने 13 जनवरी को आदेश पारित किया। नूंह अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जमानत आदेश मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं है, बल्कि पुलिस द्वारा अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया की समीक्षा के आधार पर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता रोहित ने 8 जनवरी को पुन्हाना सिटी थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि हंसी ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें सीएनजी वाहनों से जुड़े एक विषय पर चर्चा के दौरान दलित समाज के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसी दिन एफआईआर दर्ज कर हंसी को गिरफ्तार कर लिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ताहिर हुसैन देवला ने अदालत में दलील दी कि आरोपी की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) और सतेंद्र कुमार एंटिल बनाम सीबीआई (2021) के निर्देशों के विपरीत की गई।
उन्होंने कहा कि आरोपित अपराध में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। इसके बावजूद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी नहीं किया गया। साथ ही गिरफ्तारी से संबंधित चेकलिस्ट भी प्रस्तुत नहीं की गई और मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस हिरासत की मंजूरी देते समय आवश्यक संतोषजनक कारण दर्ज नहीं किए गए।
राज्य की ओर से लोक अभियोजक जगबीर सिंह और शिकायतकर्ता के अधिवक्ता डी.सी. गुप्ता ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों को गंभीर बताया। करीब 45 मिनट तक चली बहस के बाद अदालत ने पुलिस की प्रक्रिया में गंभीर चूक पाते हुए हंसी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों पुलिस अधिकारियों को 19 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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