Special Story: ''हरियाणा’ नहीं था इस धरती का पुराना नाम; 185 साल पहले अंग्रेजों ने दिया था यह नाम...पढ़ें पूरा इतिहास
punjabkesari.in Saturday, Aug 22, 2026 - 05:22 PM (IST)
डेस्क: हरियाणा एक ऐसा राज्य है जो प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति का केंद्र रहा है। आज हम इसे हरियाणा के नाम से जानते हैं, लेकिन प्राचीन काल में इस क्षेत्र को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था। हरियाणा का प्राचीन नाम मुख्य रूप से ब्रह्मवर्त (Brahmavarta), आर्यावर्त (Aryavarta) और ब्रह्मौपदेश (Brahmoupdesa) थे। ये नाम वैदिक ग्रंथों और पुराणों में वर्णित हैं और इस भूमि के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं। इस लेख में हम हरियाणा के प्राचीन नामों, उनके अर्थ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
जानकर हैरानी होगी, पर ये सच है कि ‘हुरियाना’ नाम से हरियाणा का उदय 185 साल पहले ही हो गया था। पर ‘हुरियाना’ से हरियाणा 1966 में बना। 1824 में ब्रिटिश सरकार ने ज्वाइंट पंजाब (पाकिस्तान व भारत का मिलाकर) में रेवेन्यू ओवरहॉलिंग का काम शुरू किया। इसके लिए अंग्रेजों ने पहले रेवेन्यू संबंधी सप्लीमेंटरी सेटलमेंट रिपोर्ट और फिर फाइनल सेटलमेंट रिपोर्ट तैयार करनी शुरू की।
इसी प्रक्रिया के अंतर्गत 1830 में अंग्रेजों ने रेवेन्यू सेटलमेंट के दौरान विभिन्न इलाकों की मालगुजारी तय करनी थी। मालगुजारी तय करने के लिए ज्वाइंट पंजाब के विभिन्न हिस्सों को अलग-अलग क्षेत्रों के तहत चिन्हित किया जाना था। पंजाब का ऊपरी हिस्सा पहले से ही मालवा, दोआबा, मांझा व पोवाध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लिहाजा, अंग्रेजों को इन क्षेत्रों की मालगुजारी तय करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। संयुक्त पंजाब के दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र (आज हरियाणा) की उन दिनों कोई खास पहचान नहीं थी।
लिहाजा, 1832 में जब रैवेन्यू मैप तैयार किया गया तो इसमें ब्रिटिश सरकार के विशेषज्ञों ने स्थानीय विशेषज्ञों से मंत्रणा कर इस दक्षिणी-पूर्वी पंजाब के हिस्से को ‘हुरियाना’ नाम दिया। इस नाम के पीछे स्थानीय लोगों ने इलाके में महाभारत के युद्ध के दौरान इस जमीं पर ‘हरि’ का यहां ‘आना’ और इस क्षेत्र में काफी हरियाली का होना जैसे तर्क दिए। इन्हीं प्रचलित तर्कों को आधार बनाते हुए 1832 में अंग्रेज विशेषज्ञों ने भी अपने रेवेन्यू मैप में इस इलाके को ‘हुरियाना’ का नाम देकर इस इलाके को एक अलग पहचान दे दी थी।
लेकिन 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग करके अंग्रेजों हुरियाना से मिलते-जुलते नाम से इस प्रांत का नाम हरियाणा रख दिया। हरियाणा अभिलेखागार विभाग की डिप्टी डायरेक्टर, साहित्यकार एवं शोधकर्ता डॉ. राजवंती मान के अनुसार इस क्षेत्र को हुरियाना नाम से अंग्रेजों ने ही अपने रेवेन्यू मैप में 185 साल पहले दर्शा दिया था, लेकिन इसका औपचारिक नाम 1 नवंबर 1966 को पड़ा।
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हरियाणा क्षेत्र को निम्नलिखित नामों से जाना जाता था
1. ब्रह्मवर्त (Brahmavarta)
मनुस्मृति में ब्रह्मवर्त को सरस्वती और दृषद्वती नदियों के बीच का पवित्र क्षेत्र बताया गया है। यह वह भूमि है जहां भगवान ब्रह्मा का अवतरण हुआ और सृष्टि की रचना हुई। इस कारण इसे "सृष्टि का केंद्र" या "देवताओं की भूमि" माना जाता है। हरियाणा का अधिकांश भाग इसी क्षेत्र में आता है।
2. आर्यावर्त (Aryavarta)
यह नाम आर्यों के निवास स्थान को दर्शाता है। वैदिक काल में यह क्षेत्र आर्य संस्कृति और वेदों के प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र था। मनुस्मृति और अन्य ग्रंथों में आर्यावर्त को हिमालय से विंध्याचल तक का क्षेत्र बताया गया है, जिसमें हरियाणा प्रमुख रूप से शामिल है।
3. ब्रह्मौपदेश (Brahmoupdesa)
यह नाम वैदिक शिक्षाओं और ब्राह्मणों के उपदेशों से जुड़ा है। इस क्षेत्र को वेदों की रचना और धार्मिक अनुष्ठानों का घर माना जाता था।
इसके अलावा, कुछ अन्य प्राचीन नाम जैसे बहुधान्यक (Bahudhanyaka) और हरियंका (Hariyanka) भी मिलते हैं, जो इस भूमि की उर्वरता और प्रचुर अनाज उत्पादन को इंगित करते हैं। महाभारत काल में इसे कुरुक्षेत्र के रूप में जाना जाता था, जहां महाभारत का युद्ध हुआ और भगवद्गीता का उपदेश दिया गया।
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