एक बार फिर बारिश ने भिगोया धान

11/29/2019 1:02:45 PM

यमुनानगर (त्यागी): गत रात्रि आई बारिश के कारण अचानक मौसम ने करवट ली। बारिश की वजह से एक बार फिर मंडी में पड़ी धान को नुक्सान हुआ। हालांकि धान की सीजन लगभग खत्म हो चुका है, बावजूद इसके कुछ धान ऐसी थी जो आढ़तियों की दुकानों के आगे खुले में पड़ी थी। ऐसी धान को बारिश की वजह से नुक्सान हुआ है, क्योंकि इस धान पर जो तिरपाल आदि भी ढकी हुई थी वह भी हवा में उड़ गई और धान बोरियों में पड़ी होने के बावजूद भीग गई।  जिले की लगभग सभी मंडियों में ऐसा हुआ। हालांकि सरकारी धान सभी शैड के नीचे थी जो भी धान आढ़तियों के बाहर रखी थी वह धान भीगी है।

इसके अतिरिक्त धान से निकलने वाला कचरा जिसे की तुरंत उठाया जाना चाहिए था को नहीं उठाया गया और वह सीवरेज में पहुंच गया या फिर उसे आग लगा दी गई। दोनों ही तरह से इस कचरे ने नुक्सान पहुंचाया। एक और तो यह कचरा प्रदूषण का कारण बना, दूसरी ओर इस कचरे की वजह से तमाम सीवरेज चोक हो गए। आढ़तियों का कहना था कि धान के इस कचरे को तुरंत हटाया जाना चाहिए था लेकिन इसे खत्म करने के लिए इसको उठाया नहीं गया, बल्कि इसमें आग लगा दी गई, जिससे और भी अधिक नुक्सान हुआ। हालांकि बारिश अधिक तेज नहीं थी लेकिन रुक-रुककर रातभर बारिश होती रही, जिससे तापमान भी एक दम गिर गया और मंडी में धान भी भीग गया। इसके अतिरिक्त किसानों के लिए भी बारिश का मिला-जुला असर रहा। 

सीवरेज बंद, मुसीबत बढ़ी
बिलासपुर मंडी में भी अनाज की खरीद फरोख्त लगभग बंद हो चुकी है। धान के कारण जो कचरा मंडी में इक_ा हुआ है वह इस बारिश के कारण और भी अधिक मुसीबत का कारण बन गया है। धान के इस कचरे को यदि समय रहते उठा लिया जाता तो इससे किसी प्रकार का कोई नुक्सान न होता लेकिन इस कचरे के न उठाए जाने से बारिश के कारण यह सारा कचरा बहकर सीवरेज में चला गया और जिसकी वजह से सीवरेज चोक हो गया। चारों और सीवरेज चोक होने के कारण मुसीबत पैदा हो गई। आढ़तियों ने बताया कि समय रहते इस कचरे को तुरंत यहां से उठाया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ जो मुसीबत का कारण बना। हालांकि धान का सीजन लगभग खत्म हो चुका है और धान की आवक भी नहीं हो रही है। ऐसे में मंडी की साफ सफाई तुरंत हो जानी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बारिश की वजह से मुश्किलें बढ़ गई। 

करीब 500 बोरी भीग गई मंडी में
रादौर अनाज मंडी से मिली जानकारी के अनुसार अनाज मंडी में लगभग धान का उठान हो चुका है। सरकारी स्तर पर सारा धान उठा लिया गया है या फिर शैड के नीचे रख दिया गया है। कुछ आढ़ती की दुकानें ऐसी हैं जिनकी आगे धान की बोरियां भारी संख्या में रखी है। रात को आई बारिश के चलते धान की ये बोरियां भीग गई। मिली जानकारी के अनुसार 500 से अधिक बोरियां ऐसी थी जो आढ़तियों की दुकानों के सामने खुले में रखी थी और वह बारिश के कारण भीग गई। मिली जानकारी के अनुसार सरकार की जो धान की खरीद थी वह सब शैड में थी और किसी प्रकार का कोई नुक्सान नहीं हुआ। यदि कुछ दिन पहले बारिश आती तो नुक्सान जरूर होता।  खिजराबाद-छछरौली मंडी से भी कुछ इसी प्रकार की सूचना है।

मिली जानकारी के अनुसार बारिश का यहां भी कोई विशेष प्रभाव देखने को नहीं मिला, क्योंकि इस क्षेत्र में बारिश भी कम आई और धान भी यहां मंडियों में नहीं था। बारिश की वजह से मंडियों में पड़ी गंदगी बहकर नालियों व सीवरेज में गई, जिसकी वजह से परेशानी बढ़ी। हर किसी का यही कहना था कि जैसे ही धान की आवक मंडी में बंद हुई तो तभी यहां से कूड़ा-कर्कट साफ कर दिया जाना चाहिए था।  यदि समय रहते यह साफ कर दिया जाता तो किसी प्रकार से यहां दिक्कत न आती।  इस संबंध में जब मार्कीट कमेटी के सचिव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे सम्पर्क न होने की स्थिति में अन्य अधिकारी ने बताया कि मंडी में साफ सफाई का कार्य शुरू किया जाना है, जिसे जल्द ही करवाया जाएगा। यदि बारिश न आती तो शायद आज मंडी में साफ सफाई का कार्य हो जाता।


Isha

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