हरियाणा के 12 जिले शीतलहर की चपेट में, आमजन, किसानों व पशुपालकों से सतर्कता बरतने की अपील, रात्रि पारा 5 डिग्री से नीचे
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 09:10 AM (IST)
चंडीगढ़/हिसार : पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के चलते मैदानी क्षेत्रों में ठंड का प्रकोप ज्यादा बढ़ गया है। हरियाणा और पंजाब में हाड़ कंपा देने वाली ठंड का ट्रिपल अटैक देखने को मिल रहा है। कहीं धुंध कोहरा के साथ कोल्ड डे की स्थिति तो कहीं सर्द हवा और पाला जमने की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। दिन और रात के तापमान सामान्य से नीचे बने हुए हैं।
हरियाणा के 12 जिले शीतलहर की चपेट में हैं। इन सभी जिलों में जम्मू सिटी और धर्मशाला जैसे शहरों से ज्यादा ठंड पड़ रही है। नारनौल का 24 घंटे में दोपहर का पारा 6.9 डिग्री सैल्सियस तक लुढ़क गया है। जींद और चरखी दादरी में सबसे ज्यादा ठंड पड़ रही है। इन दोनों जगहों पर दोपहर का तापमान 12 डिग्री सैल्सियस से कम रहा। रात्रि तापमान सबसे कम नारनौल 4.5 डिग्री सैल्सियस रहा। भिवानी का 5.5, सिरसा का 5.7 व गुरुगामा का 5.9 डिग्री सैल्सियस रात्रि तापमान रहा।
मौसम विभाग ने बुधवार को लेकर भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं शीत लहर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने आमजन के लिए कार्य योजना तैयार की है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, विकास एवं पंचायत, शिक्षा, शहरी स्थानीय निकाय सहित सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है ताकि शीत लहर से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठा लिए जाएं। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे आवश्यकतानुसार गर्म कपड़े, दवाइयां और अन्यजरूरी सामग्री पहले से सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा घर के अंदर कोयला या अंगीठी जलाने से बचें, क्योंकि इससे उत्पन्न गैस जानलेवा साबित हो सकती है। सुन्नता, उंगलियों, पैर की उंगलियों, कान और नाक के सिरे पर सफेद या पीला रंग दिखने पर सतर्क रहें।
पाला फसलों के लिए नुकसानदायक
उन्होंने बताया कि शीतलहर और पाला फसलों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। कृषि विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीत लहर के कारण गेहूं व जौ में काला रतुआ, सरसों व सब्जियों में सफेद रतुआ तथा आलू-टमाटर में लेट ब्लाइट जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। किसान बोडों मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराइड का छिड़काव करें। पशुओं के आवास को भी चारों ओर से ढकें।
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