‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ का काम पूरा, अम्बाला इसकी बदौलत बनेगा पर्यटन केंद्र: विज

punjabkesari.in Saturday, Dec 04, 2021 - 09:32 AM (IST)

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने नही लड़ी के दावे झूठे व  बेनकाब करने की जिद्द तथा अंबाला कैंट से आजादी की पहली लड़ाई 1857 में शुरू हुई को साबित करने के लिए अम्बाला कैंट से छठी बार अनिल विज के देखें ख्वाब अब पूरे होने वाले हैं । अनिल विज के कड़े प्रयासों के माध्यम से अंबाला कैंट के अंदर आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक का कामअगले वर्ष कंप्लीट होने की संभावना है । अंबाला कैंट के अंदर बनने वाला शहीद स्मारक कैसे बना इस मामले में भी एक रोचक प्रसंग है। हरियाणा के गृह निकाय व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि कांग्रेस हमेशा यह दावा करती है कि देश की आजादी की लड़ाई उन्होंने लड़ी जबकि कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए ओ ह्यूम ने की। व्हिच मानते हैं कि कांग्रेस के इस झूठ को बेनकाब करने के लिए उन्होंने इतिहासकारों के माध्यम से रिसर्च करवाई तो पता लगा की 1857 की क्रांति की शुरुआत अंबाला से हुई। विज का कहना है कि कांग्रेस की स्थापना से 29 साल पहले देश की आजादी की चिंगारी अंबाला कैंट से शुरू हुई। कांग्रेस यह दावा करे कि देश की आजादी की लड़ाई उन्होंने लड़ी यह बेबुनियाद है। 

विज ने बताया कि पर्यटन की दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर का स्मारक अपनी अलग छाप छोड़ेगा, देश के मानचित्र पर यह आयेगा। अम्बाला का गौरव बढ़ेगा, यहां से गुजरने वाले लोग इस स्मारक को देखे बिना नहीं जायेगे। अनसंग वीरों की अनेक गाथाएं यहां पर प्रदर्शित होंगी। यहां पर अनेकों ऐसे दृश्य होंगे जिसे देखकर लोग अचम्भित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम 1857 की क्रांन्ति के अनसंग असंख्य योद्धाओं व सेनानियों को राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।  अनिल विज ने सबसे पहले वर्ष 2000 में जब हरियाणा के अंदर मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला हुआ करते थे तब विधानसभा के अंदर सबसे पहले यह मांग रखी थी कि अंबाला कैंट के अंदर से आजादी की लड़ाई की शुरुआत हुई इसलिए वहां स्मारक बनना चाहिए। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब हरियाणा के मुख्यमंत्री थे तब भी अनिल विज विधानसभा के अंदर लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आश्वासन दिया कि वह स्मारक बनाई जाएगी। मगर उस वक्त कांग्रेस के अंदर सांसद व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा वाह मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा में राजनीतिक जंग के चलते यह काम आगे नहीं बढ़ पाया।

 लगभग 7 साल से चल रहा काम
2014 में हरियाणा के अंदर भाजपा की सरकार आई तथा अनिल विज कैबिनेट मंत्री बने। अनिल विज ने सबसे पहले अंबाला कैंट के अंदर 18 सो 57 की क्रांति के अनगिनत योगदान देने वाले योद्धाओं के स्मारक बनाने पर काम शुरू करवाया। लगभग 7 साल से चल रहे इस कार्य को तीव्र गति से करवाया जा रहा है। हरियाणा के गृह, शहरी स्थानीय निकाय एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम 1857 की क्रांन्ति के अनसंग असंख्य योद्धाओं व सेनानियों की याद में अंबाला में बनाया जा रहा  ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।इसकी बदौलत अम्बाला जल्दी ही एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा। विज ने कहा कि संभवतः देश का सबसे बड़ा व आधुनिक तकनीक से लैस शहीद स्मारक होगा। उन्होंने कहा कि षहीद स्मारक को स्थापित करने के संबंध में विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा विष्वविद्यालय से संबंधित अधिकारियों की राज्य स्तर की एक कमेटी का गठन किया जाएगा ताकि शहीद स्मारक को तैयार करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए स्मारक को जल्द से जल्द स्थापित किया जा सकें।  
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विज ने कहा कि इस शहीद स्मारक को तैयार करने के लिए इतिहास की पुख्ता वस्तुओं व कहानियों को दिखाने हेतू 1857 से संबंधित इतिहासकारों की एक कमेटी का गठन किया जाएगा जिसमें वे अपने-अपने अध्ययन के अनुसार जो सुझाव देंगें, उन्हें स्मारक में विभिन्न कलाकृतियों, आर्ट, लाईट एंड साऊंड इत्यादि के माध्यम से आंगुतकों के ज्ञान के लिए दर्षाया जाएगा और इसी संबंध में जल्द ही अधिसूचना भी जारी की जाएगी। इसी प्रकार, पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी आफ परफोरर्मिंग एंड विज्युल आर्टस के अधिकारियों की एक टीम का गठन किया जाएगा ताकि वे स्मारक स्थल का निरीक्षण कर विभिन्न सुझाव राज्य स्तर पर बनाई जाने वाली कमेटी को दे सकें। यह टीम स्मारक में लगाई जाने वाली विभिन्न प्रदर्शित वस्तुओं के रख-रखाव व मूल्यांकन के लिए अपने सुझाव भी देगी। ऐसे ही, स्मारक को षीध्र स्थापित करने के लिए क्यूरेटर भी नियुक्त किए जाएंगें।  विज के अनुसार स्मारक में अब आर्ट वर्क के तहत कार्य किया जायेगा और तीन चरणों में यह कार्य किया जायेगा। पहले चरण के तहत अम्बाला में 1857 की क्रांति कब शुरू हुई थी, कहां से शुरू हुई थी, उसका इतिहास दिखाया जायेगा। दूसरे चरण में हरियाणा में 1857 की क्रांति कहां-कहां लड़ी गई, उसका वर्णन किया जायेगा और तीसरे चरण में हिन्दुस्तान में कहां-कहां आजादी की लड़ाई लड़ी गई, झांसी की रानी, बहादुरशाह जफर के साथ-साथ अन्य क्रांतिकारियों ने अपनी क्या-क्या भूमिका निभाई, उसका भी वर्णन किया जायेगा।

स्मारक अपनी तरह का आधुनिक तकनीक से लैस स्मारक होगा
विज ने बताया कि  यह स्मारक अपनी तरह का आधुनिक तकनीक से लैस स्मारक होगा जिसमें आज की आधुनिक डिजीटल तकनीक का इस्तेमाल इतिहास को दिखाने के लिए किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि इस स्मारक में तीन भागों में 1857 की कं्राति का पर्दापरण होगा जिसमें पहले चरण के तहत अम्बाला में 1857 की क्रांति कब शुरू हुई थी, कहां से शुरू हुई थी, उसका इतिहास दिखाया जायेगा। दूसरे चरण में हरियाणा में 1857 की क्रांति कहां-कहां लड़ी गई, उसका वर्णन किया जायेगा और तीसरे चरण में हिन्दुस्तान में कहां-कहां आजादी की लड़ाई लड़ी गई, झांसी की रानी, बहादुरशाह जफर के साथ-साथ अन्य क्रांतिकारियों ने अपनी क्या-क्या भूमिका निभाई, उसका भी वर्णन किया जायेगा।


स्मारक में लोगों की सुविधा के लिए इंडोर नेवीगेषन सिस्टम होगा
बैठक में बताया गया कि इस स्मारक में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए इंडोर नेवीगेषन सिस्टम होगा जिसके तहत आडियो के माध्यम से आंगुतक को स्मारक में आने खडे होने की जानकारी मुहैया हो पाएगी। इसी प्रकार, 1857 की क्रंाति की इस लड़ाई की योजना को भी डिजीटल तकनीक से दर्षाने का काम होगा और भी बताया जाएगा कि किस प्रकार से 1857 के बाद अगले 90 सालों के लिए स्वतंत्रता का संग्राम लडा गया। 

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857 केे काल की आर्थिक, राजनीतिक, प्रषासनिक, धार्मिक व सामाजिक परिस्थितियों का भी व्यापक वर्णन होगा
बैठक में बताया गया कि इस स्मारक में 1857 केे काल की आर्थिक, राजनीतिक, प्रषासनिक, धार्मिक व सामाजिक परिस्थितियों का भी व्यापक वर्णन आधुनिक तकनीक के प्रयोग के माध्यम से किया जाएगा। इसी प्रकार, स्मारक में स्थापित किए जाने वाले संग्रहालय में इतिहास से जुडी पुख्ता वस्तुओं को प्रदर्षन होगा क्योंकि संग्रहालय में रखी जाने वाले वस्तुओं से लोगों को सही ज्ञान प्राप्त करने का एक माध्यम भी प्राप्त होता हैं। 

स्मारक में डिजीटल संकल्प स्तंभ की भी होगी स्थापना
अनिल विज के अनुसार हरियाणा व राज्य के कारीगरों को बढावा देने के मदेनजर इस स्मारक में विभिन्न ऐसी वस्तुओं को भी दर्षाया जाएगा जोकि हरियाणा के देहात में विभिन्न कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है। स्मारक में डिजीटल संकल्प स्तंभ की भी स्थापना की जाएगी ताकि आने वाले लोग देषभक्ति के प्रति एक संकल्प लेकर जाए। बैठक में बताया गया कि यह संकल्प स्तंभ अपनी तरह का अलग डिजीटल स्तंभ होगा जिसमें विभिन्न प्रकार की लाईटों के प्रकाष का उजाला संकल्प लेते समय निकलेगा। इसी प्रकार, देष-विदेष के चित्रकारों के दुर्लभ चित्र भी स्मारक के दीवारों पर होंगें जिसमें आजादी की पहली लड़ाई के दृष्य होंगें। 

ओपन एयर थियेटर भी बनाया जाएगा
 स्मारक में ओपन एयर थियेटर भी बनाया जा रहा है कि जिसमें हरियाणा सरकार की उपलब्धियां दिखाई जाएगी और लाईट एंड साऊंड भी होगा। 

लगभग 350 करोड़ रूपए की लागत से तैयार होगा स्मारक
उल्लेखीनय है कि यह शहीद स्मारक सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा स्थापित किया जा रहा हैं जोकि लगभग 350 करोड़ रूपए की लागत से बनाया जा रहा है। यह शहीद स्मारक 22 एकड़ भूमि में स्थापित होगा और संभवतः यह अगले वर्ष तक तैयार हो जाएगा।

     


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Content Writer

Isha

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