ये कैसा बेटी बचाओ अभियान, रात में बेटियों को रोडवेज बस में बिठाने से इंकार

Sunday, February 11, 2018 1:32 PM
ये कैसा बेटी बचाओ अभियान, रात में बेटियों को रोडवेज बस में बिठाने से इंकार

यमुनानगर(ब्यूरो): सरकार द्वारा चलाया जा रहा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान केवल कागजों तक ही सीमित होता दिखाई दे रहा है। जबकि हकीकत कुछ और ही है। आपको बता दें कि बीती रात पंजाब से लौट रही 6 बेटियों के साथ रोडवेज बस में एक ऐसा वाकया हुआ जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा और एक टीचर के घर रात गुजारनी पड़ी।

हुआ यूं कि पंजाब में एक योग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें शहर के एक स्कूल से प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एक अध्यापिका और 6 लड़कियां गई हुई थीं। प्रतियोगिता में भाग लेकर वह पंजाब के शहर लुधियाना से यमुनानगर के लिए रवाना हुईं। इस दौरान उन्हें जो बस मिली वह केवल अम्बाला तक ही आनी थी। वह सब करीब 8 बजे अम्बाला कैंट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यमुनानगर के लिए बस की तलाश की तो बसें उत्तराखंड व हिमाचल परिवहन की मिली। लड़कियों ने बस कंडक्टर से यमुनानगर ले जाने का आग्रह किया लेकिन उसने उन्हें बिठाने से साफ मना कर दिया। तर्क दिया कि उनकी बस लॉन्ग रूट की है। वह इस बस को जगाधरी-यमुनानगर में नहीं रोकेंगे। 

हालांकि इन सभी बसों को यमुनानगर-जगाधरी होकर ही गुजरना था, बावजूद इसके किसी भी चालक व परिचालक ने करीब 8 बजे तक इस महिला अध्यापक वह इनके साथ प्रतियोगिता में भाग लेने गई बच्चियों को बस में नहीं बिठाया। करीब 2 घंटे तक रात को यह सभी लड़कियां बस स्टैंड पर ही परेशान होती रहीं। इस दौरान रेल का भी कोई समय नहीं था, रात को इन्हें करीब 10 बजे एक बस मिली। रिक्वेस्ट करने पर लड़कियों को उसने बैठने की अनुमति दी। इसके बाद करीब 11 बजे यह सभी यात्री जगाधरी बस स्टैंड पर पहुंचे।

अध्यापिका ने बताया।
अध्यापिका माही ने बताया कि देश में यह कैसा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चल रहा है। बेटियों को रात के समय बस में बैठने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कहा जा रहा है कि यह बस तो लंबे रूट की है और यह जगाधरी-यमुनानगर में नहीं रुकेगी, जबकि सभी बसों को जगाधरी होकर ही हरिद्वार व उत्तराखंड के अन्य शहरों में पहुंचना होता है। अम्बाला से चलकर यह सभी बसें थाना छप्पर के पास रात को करीब आधा घंटा तक ढाबे पर तो रुक सकती हैं लेकिन महिला सवारियों को उतारने के लिए इनके पास समय नहीं होता। ऐसे में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का क्या औचित्य है, जबकि बेटियों को बसों में बैठने के लिए भी अनुमति नहीं है।

रात को अपने घर ही ठहराया लड़कियों को
इन खिलाडिय़ों के अभिभावकों की चिंता बढऩा भी स्वाभाविक था। देर रात शहर में पहुंचने पर सभी लड़कियों को अध्यापिका माही ने अपने घर में ठहराया। उनका कहना था कि रात को देर हो चुकी थी और इन लड़कियों के इनके घर तक जाने के लिए उस समय कोई सवारी नहीं थी, जिस कारण सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने इन बच्चियों को अपने घर में ही रखने में भलाई समझी।

यह कहना है रोडवेज जी.एम. का
यमुनानगर डिपो के जी.एम. रविन्द्र पाठक का कहना है कि शिकायत पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। यदि बस चालक किसी यात्री को नहीं बिठाता तो उस गाड़ी का नंबर नोट कर डायरैक्टर चंडीगढ़ के नाम शिकायत भेजी जा सकती है। इसके अलावा जिस भी डिपो की बस है उसके जी.एम. को शिकायत की जा सकती है। यहां से जो भी संज्ञान लिया जाएगा उसे शिकायतकर्ता के पास भेजा जाएगा।

यह कहना है समाज सेविका का
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़ी व समाज सेविका इंदु कपूर का कहना है कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। इस तरह की घटनाएं ही अपराध को जन्म देती हैं। बसों में सीट संख्या 1 से 20 तक महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं। यहां तो महिलाओं के लिए बस ही नहीं रोकी गई जो कि पूर्णतया गलत है। जिन लड़कियों ने इन दिक्कतों का सामना किया है। उन्हें शिकायत करनी चाहिए। अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेते हुए बस चालक व परिचालक पर कार्रवाई करनी चाहिए।

यह बोलीं कांग्रेस नेत्री
कांग्रेस नेत्री व पूर्व प्रत्याशी पिंकी छप्पर का कहना है कि भाजपा सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारा महज दिखावा मात्र है। पूरे देश में बेटियों व महिलाओं का सबसे ज्यादा शोषण हरियाणा में ही हो रहा है। हर-रोज महिलाओं व बेटियों के साथ कोई न कोई अप्रिय घटना घट रही है। भाजपा के राज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।



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