स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्यमी सिमरप्रीत सिंह ने युवाओं को किया प्रेरित
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 06:04 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : पंजाब के उद्यमी सिमरप्रीत सिंह का नाम हाल ही में हुरुन इंडिया अंडर 35 सूची 2025 में शामिल किया गया है, जिसमें देश के उभरते युवा उद्यमियों और नेताओं को स्थान दिया जाता है। सौर ऊर्जा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में सक्रिय सिमरप्रीत सिंह की पेशेवर यात्रा शिक्षा, अनुभव और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी रही है। लेकिन यह सफलता एक दिन में नहीं मिली। इसके पीछे कई सालों की मेहनत, सीख और लगातार आगे बढ़ने की इच्छा है। भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में कई युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ी है। इसी क्रम में सिमरप्रीत सिंह का नाम सामने आता है, जिन्होंने ऊर्जा और सौर समाधान के क्षेत्र में काम करते हुए हरटेक ग्रुप का नेतृत्व किया है। उनकी पेशेवर यात्रा उद्यमिता, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और नेतृत्व से जुड़े विभिन्न चरणों को दर्शाती है।
कंपनी ने देशभर में 200 मेगावॉट से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए हैं, जिनमें 1.5 मेगावॉट का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट स्वर्ण मंदिर में भी शामिल है। इसके साथ ही हरटेक ग्रुप अब देश के शीर्ष 3 क्लीन एनर्जी खिलाड़ियों में गिना जाता है और 10 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ चुका है। 2030 तक इसका लक्ष्य 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर हासिल करना है। सिमरप्रीत बताते हैं कि उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव साल दो हजार ग्यारह में आया, जब उनकी मुलाकात भारत रत्न डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम से हुई। उस समय वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। कलाम साहब ने कहा था कि भारत तब बदलेगा जब हर घर अपनी बिजली खुद बनाएगा। यह बात सिमरप्रीत के दिल में बस गई और आगे चलकर उनके करियर की दिशा बन गई।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने मुंबई के एसपी जैन से एमबीए किया और फिर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से आगे की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान उन्हें तकनीक और नेतृत्व की समझ मिली, लेकिन असली सीख उन्हें गांवों और छोटे शहरों में जाकर मिली। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले की यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि आज भी कई घरों में बिजली नहीं है। उस अनुभव ने स्वच्छ ऊर्जा को लेकर उनकी सोच को और मजबूत किया। वे अक्सर कहते हैं कि भारत हर साल लाखों इंजीनियर तैयार करता है, जिनकी वजह से हमारे आसपास की दुनिया चलती है। मोबाइल फोन से लेकर सड़कें और बिजली की व्यवस्था तक सब कुछ इंजीनियरों की मेहनत का नतीजा है। इसके बावजूद उनके काम पर कम ध्यान दिया जाता है। सिमरप्रीत मानते हैं कि इंजीनियर अपने काम को दिखाने के बजाय उसे सही तरीके से करने पर भरोसा करते हैं।
शुरुआत में उन्हें पैसे, नीतियों और तकनीक से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका कहना है कि मुश्किलें हमें रोकने नहीं बल्कि सिखाने आती हैं। उनकी मेहनत को कई मंचों पर सम्मान मिला है। वे फोर्ब्स थर्टी अंडर थर्टी एशिया की सूची में शामिल हो चुके हैं। उन्हें प्राइड ऑफ इंडिया अवॉर्ड और महिंद्रा राइज सस्टेनेबिलिटी चैंपियन अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा उनका नाम दुनिया के सौ सबसे प्रभावशाली सिखों में भी शामिल है। वे तीन टेडएक्स टॉक्स दे चुके हैं और आईआईएम, एसपी जैन और नरसी मोंजी जैसे संस्थानों में युवाओं से बातचीत कर चुके हैं। अपने काम के साथ साथ सिमरप्रीत ने द जर्नी विद सिमरप्रीत सिंह नाम से एक पॉडकास्ट भी शुरू किया है, जिसके अब तक सैंतालीस एपिसोड आ चुके हैं। इस पॉडकास्ट में अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया, अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद, एवन साइकिल्स के एमडी ओंकार सिंह पाहवा, मेदांता अस्पताल के संस्थापक डॉक्टर नरेश त्रेहन, सोनालिका ग्रुप के वाइस चेयरमैन डॉक्टर अमृत सागर मित्तल, निक बेकर के डायरेक्टर निखिल मित्तल और मिसेज बेक्टर फूड्स की संस्थापक रजनी बेक्टर जैसे नाम शामिल हो चुके हैं। बातचीत में जीत हार, बचपन की बातें, जिंदगी के उतार चढ़ाव और उनसे मिली सीख को आसान भाषा में रखा जाता है, जिससे यह पॉडकास्ट युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
इतने व्यस्त जीवन के बावजूद सिमरप्रीत संतुलन को बहुत जरूरी मानते हैं। परिवार के साथ समय बिताना, फिटनेस, क्रिकेट और प्रकृति के करीब रहना उनकी जिंदगी का हिस्सा है। किताबें पढ़ना उन्हें नई सोच देता है और तरोताजा रखता है। सिमरप्रीत सिंह की कहानी यह बताती है कि एक सही सोच, मजबूत इरादा और देश के लिए कुछ करने का जज्बा किसी भी युवा की जिंदगी की दिशा बदल सकता है। उनकी यात्रा उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कुछ अलग और बेहतर करने का सपना देखते हैं।