सुषमा स्वराज के निधन पर अंबाला वासियाों का झलका दर्द, पुरानी यादों को किया ताजा...

punjabkesari.in Wednesday, Aug 07, 2019 - 11:04 AM (IST)

अंबाला (अमन कपूर): अम्बाला की बेटी और प्रखर प्रवक्ता के रूप में मशहूर देश की तेज तर्रार मंत्री रही सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन से अम्बाला वासी क्षुब्ध हैं। बता दें कि सुषमा स्वराज ने प्राथमिक शिक्षा पलवल से प्राप्त की लेकिन बीए की शिक्षा अम्बाला से ही प्राप्त की। अम्बाला ही नहीं हरियाणा से उनका निजी व राजनीतिक रिश्ता बहुत गहरा रहा है। उनको याद करके आज उनके पड़ोसी, सहपाठी ओर कनिष्ठ सहयोगियों की आंखे नम जो गई हैं और वो कहते हैं कि सुषमा के जाने से उनकी पीठ थपथपाने वाली शख्सियत उन्हें बिलखता छोड़ कर चली गई।

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वरिष्ठ प्रोफेसर यू वी सिंह ने कहा कि राजनीति की प्रखर वक्ता और हँसमुख चेहरे वाली अम्बाला की बेटी स्वर्गीय सुषमा स्वराज सबको बिलखता छोड़ कर चली गई। उनका अम्बाला वासियों और देश की राजनीति में अहम योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनका कहना है कि वे एक ओजस्वी वक्ता होने के साथ साथ राजनीति की प्रखर सियादतदान मानी जाती थी। वे संसद में भी अपनी आवाज बेबाकी से उठाती थी। सुषमा का ओजस्वी वक्तव्य के बार उन्हें ऊंची पहचान बनाई और विदेशों में भी सियासतदान इनका लोहा मानते थे। प्रोफेसर यू वी सिंह का कहना है कि एनसीसी  कैडेट के रूप राज्यपाल से अवार्ड भी प्राप्त किया। नम आंखों से आज उन्हें सारा अम्बाला उन्हें श्रद्धांजलि दी रहा है।

वहीं सुषमा स्वराज के कॉलेज में एक साल जूनियर रहे साथी नवल सूद का कहना है कि यह समाचार सुनते ही उन्हें एक जोरदार झटका लगा और वे स्तब्ध रह गए कि उनकी कॉलेज के समय की दबंग साथी आज दुनिया को छोड़ कर चली गई। नवल सूद का कहना है कि जब उनकी बेटी की शादी थी तो वह सुषमा जी को बुलाने दिल्ली गए थे तो सुषमा जी ने उन्हें एक बुआ के रूप में आने का वायदा भी किया था।

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उनका कहना है कि एनसीसी कैडेट के रूप में सुषमा ने बहुत नाम कमाया वहीं एक प्रखर प्रवक्ता और सियासत दान के रूप में भी उन्होंने अंबाला को बहुत कुछ दिया। उनका कहना है कि कोई भी बड़े से बड़ा सियादतदान उनसे कोई गलत काम नहीं करवा सकता था, चाहे वह चौधरी देवीलाल ही क्यों ना रहे हो। उनका कहना है कि जनता दल के नेता जॉर्ज फर्नांडिस के अंतर्गत उन्होंने सियासत में प्रवेश किया और लीडर अपोजिशन के रूप में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी में के बार कैबिनेट मंत्री भी रही। उनके किसी भी काम को जल्दी से भुलाया नहीं जा सकता।

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सुषमा के बुजुर्ग पड़ोसी की पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि सुषमा जी जब यहां अंबाला में पढ़ाई करती थी और हम सभी को इकट्ठा करके स्पीच दिया करती थी। उसने नम आंखों से बताया कि उनका एक फेवरेट गाना था ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी जिसको सुनकर वे खूब खुश होती थी और उन्हें शाबाशी देती थी। उनका कहना है कि सुषमा की यादों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता क्योंकि वह सब से प्यार करती थी चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो। उनका कहना है कि उन्होंने अंबाला में ही नहीं बल्कि देश में अंबाला की बेटी का नाम ऊंचा किया है।

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सुषमा के अंबाला स्थित घर में काम करने वाली नौकरानी का कहना है कि वह सुषमा जी को बुआ जी के नाम से पुकारती थी और सुषमा भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। वह पिछले 6 सालों से उनके घर में काम कर रही है और जब भी सुषमा आती थी तो उन्हें खूब प्यार करती थी। जिस चीज को हम भुला नहीं पाएगी। वहीं मोहल्ले में रहने वाली एक महिला का कहना है कि सुषमा जब कभी भी अंबाला में आती थी तो बच्चे उन्हें बुआ के नाम से पुकारा करते थे और जब वे अम्बाला आती थी तो उस समय गाड़ी में से ही हाथ हिलाकर बच्चों को सहलाती थी। उनका कहना है कि वह और उनका परिवार और मोहल्ला वासी सुषमा के प्यार को कभी भुला नहीं पाएंगे।

वहीं भारतीय जनता पार्टी की नेता बनी मुनिया का कहना है कि जब वह 13 साल की थी तो सुषमा स्वराज उनका हाथ पकड़कर उन्हें राजनीति के गुण सिखाए करती थी और उन्हें कैसे भाषण देना है इसके बारे में भी बताया करती थी। उनका कहना है कि वह सुषमा को अपनी मां के समान समझती थी और उनका बहुत आदर करती थी। उनकी वजह से अंबाला की राजनीति में बनी हुई है। मुनिया का कहना है कि यह दुखद समाचार सुनकर उन्हें बहुत झटका लगा और उनका कहना है कि भगवान सुषमा स्वराज की आत्मा को शांति प्रदान करें।


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Edited By

Naveen Dalal

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