अंधविश्वास में डूबे परिवार ने 30 दिन के नवजात को मंदिर में चढ़ाया, तभी पहुंच गई पुलिस और फिर...

4/8/2021 2:31:39 PM

हांसी (संदीप सैनी): महज 30 दिनों के नवजात बच्चे को उसके माता-पिता ने हांसी के समाधा मंदिर में साधुत्व के लिए दान कर दिया। मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में लोग जुटे थे और महंतों की मौजूदगी में नवजात को मंदिर के गद्दीनशीन के सुपुर्द करने की रस्म पूरी की गई। लेकिन इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए मामला पुलिस के संज्ञान में पहुंच गया। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अंधविश्वास में डूबे बच्चे के माता-पिता व मंदिर महंत को चौकी में तलब कर लिया। पुलिस कार्रवाई की गाज गिरते देख परिवार ने बच्चा मंदिर से वापस ले लिया व उसकी परवरिश का भी वादा किया।

बता दें कि समाधा मंदिर में कुछ लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर बच्चे को पूर्व में भी चढ़ा चुके हैं। बुधवार को तीसरे बच्चे को मंदिर में महंत को सौंपा गया था। डडल पार्क निवासी फ्रूट व्यापारी ने अपने एक महीने के बच्चे को मंदिर में चढ़ाया था। मंदिर में महंतों व परिवार के सदस्यों की मौजूदी में पूरी रस्म करने के बाद बच्चे का नामकरण नारायण पुरी कर दिया गया। पुलिस ने मामला संज्ञान में आते ही दोनों पक्षों को थाने में तलब कर लिया। 

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दोनों पक्षों की तरफ से काफी संख्या में लोग सिसाय पुलिस चौकी पहुंच गए। पुलिस ने परिवार को कानूनी धाराओं से अवगत करवाते हुए समझाया और कार्रवाई की चेतावनी दी। आखिर परिवार के लोग मान गए और बच्चे की परवरिश का आश्वासन देते हुए वापस ले लिया। इस संवेदनशील मामले में पुलिस पूरा दिन गंभीरता से काम में लगी रही है।

कार्यक्रम में पहुंचे नेता और पार्षद
समाज सुधार में एक जिम्मेदार नेताओं की भी होती है, लेकिन हैरत की बात है कि मंदिर में कई नेता भी बच्चे को सुपुर्द करने की रस्म के समय हाजिर थे। इन नेताओं ने भी परिवार को समझाने की जहमत नहीं उठाई और परंपरा के नाम पर सब देखते रहे।

अंधविश्वास व आस्था में फर्क
किसी मंदिर, ईश्वर या व्यक्ति में आस्था होना अच्छी बात है और प्रत्येक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की आस्था का सम्मान करना चाहिए, लेकिन इस प्रकार से मासूम बच्चे को साधुत्व के लिए सौंपना जायज नहीं है। जिस बच्चे को दुनिया में आए महज कुछ दिन हुए हैं उसकी जिंदगी का फैसला परिवार कैसे ले सकता है। कोई भी बच्चा बालिग होने के बाद अपनी जिंदगी का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

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मंदिर के महंत पांचम पुरी ने बताया कि मंदिर में परिवार के लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर बच्चा चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने बाद एक और परिवार द्वारा बच्चा मंदिर में चढ़ाया जाना है। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद मंदिर प्रशासन इस पूरे प्रकरण में शांत है। इससे कुछ महीने पूर्व भी मंदिर में एक बच्चा ऐसे ही एक परिवार ने दान किया था, जिसका नाम पूनम पुरी रखा गया है।

वहीं इस बारे सिसाय पुलिस चौकी इंचार्ज वेदपाल नैन ने बताया की दोनों पक्षों को चौकी में तलब किया। बच्चे के परिवार ने कहा कि वह तो मंदिर में पूजा करने गए थे। लेकिन पुलिस ने लिखित में परिवार से आश्वासन लिया है कि वह बच्चे का पालन पोषण करेंगे। मंदिर प्रशास को भी इस बारे में चेतावानी दी गई है।

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Content Writer

vinod kumar

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