Haryana: गेस्ट टीचर्स के लिए खुशखबरी, HC ने लिया बड़ा फैसला

punjabkesari.in Thursday, May 28, 2026 - 09:44 AM (IST)

चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 2 दशक से गैस्ट फैकल्टी और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।

मामला सुखविंद्र सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गैस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मैरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी।

राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया तहत नियुक्त नहीं हुए थे। इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्त्ताओं की नियुक्तियां ' बैकडोर एंट्री' या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था।

सरकार ने मानी शिक्षक की कमी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल 'स्टॉप गैप अरेंजमेंट' बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 'मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य' मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं।

 

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Content Writer

Manisha rana

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