हरियाणा मानवाधिकार आयोग कोरोना काल में कर रहा बेहतर कार्य, दीप बोले- शिकायतों पर ले रहे कड़ा संज्ञान

9/2/2020 10:13:39 PM

चंडीगढ़ (धरणी): हरियाणा मानवाधिकार आयोग कोरोना काल में लोगों के दर्द को दूर करने में बड़ा योगदान दे रहा है। आयोग के पास कई प्रकार की शिकायतें आ रहीं हैं, जिन पर संज्ञान लिया जा रहा है। इस बारे आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने बताया कि कोरोना काल में हरियाणा मानव अधिकार आयोग के पास विभिन्न प्रकार की शिकायतें आई हैं। गुरुग्राम के रवि कालड़ा ने 500 अनाथ तथा वृद्ध व मानसिक रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए गुहार लगाई। जिसके लिए कमीशन ने उपायुक्त गुरुग्राम और सिविल सर्जन गुरुग्राम को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दिए। 

इसी प्रकार से हिसार से राजेश खंडेलवाल ने पुलिस की द्वारा ज्यादती की शिकायत की, जिसके ऊपर भी संज्ञान लिया गया। सैनिटाइजेशन सफाई के लिए सिरसा से आई बलदेव राज की शिकायत के ऊपर कमीशन ने अधिकारियों को इस विषय पर ध्यान करने के लिए बोला। इस बीच में जेल में बहुत सारे बंदियों को पैरोल की जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई थी, उसके अलावा पैरोल का निवेदन था, जिसे कमीशन ने डीजीपी जेल को देखने के लिए आदेश दिया।

भाटिया के अनुसार इसी प्रकार से सुबी सेठी ने अपने पिता जो 80 साल से अधिक आयु के हैं और वह फरीदाबाद में फंसे हुए थे के लिए कर्फ्यू पास कि मांग की जो कमीशन के दखल पर प्रशासन ने जारी कर दिया। संदीप अरोड़ा द्वारा दी गई शिकायत करनाल के अंदर कुछ स्थानों में लोगों को खाने पीने की दिक्कत थी उसके लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके अलावा कोरोना काल के अंदर राशन के डिपो के चलाने वालों के खिलाफ काफी सारी शिकायतें आई, जिसमें सही ढंग से राशन वितरित ना होने के बारे में कहा गया था। 

इस विषय पर कमीशन ने संज्ञान लेते हुए अलग-अलग प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके साथ ही कोरोना काल के अंदर स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गई तथा आमतौर से चलने वाली ओपीडी और ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे, जिसकी मीडिया के माध्यम से कमीशन के पास जानकारी आई। जिस पर कमीशन ने स्वतेः संज्ञान लेते हुए चिकित्सा अधिकारी तथा मेडिकल कॉलेज से इस बारे में जवाब मांगा है तथा इस विषय की भी गहराई से जांच की जा रही है की आवश्यकता वाले लोगों को आवश्यक चिकित्सा किस प्रकार से उपलब्ध हो सकती है। 

पंजाब केसरी के विशेष प्रतिनिधि चन्द्रशेखर धरनी ने आयोग के सदस्य दीप भाटिया से मुलाकात की। जिसके कुछ अंश प्रस्तुत हैं-

प्रश्न- कोरोना काल में किस प्रकार से वर्किंग कर रहे हैं। इस समय आम आदमी आप तक किस प्रकार से शिकायतें पहुंचा रहे हैं।
उतर- कोरोना से पहले बाए पोस्ट, बाए मेल और अन्य साधनों से हम तक शिकायतें पहुंचती थी। जिस पर हमारी रजिस्ट्री उसको एंटरटेन करती थी। कोई भी फिजीकली पर्सन प्रेजेंट करने की पहले किसी प्रकार से नहीं होती थी। अब कोरोना काल में तो बिल्कुल नहीं है। कोरोना काल जब से शुरू हुआ है हमारे पास कई तरह की कम्पलेन्ट आती रही है जो प्रोब्लम इन्क्रीज हुई उनको लेकर कई तरह सकी अलग अलग कम्पलेन्ट आई। 

शुरू में मई तक तो ऑफिस में केवल जरूरी कर्मचारी जैसे सफाई कर्मचारी ही आ रहे थे। मई के बाद जब से कर्फ्यू चंडीगढ़ से कर्फ्यू हटाया गया। तो हम लेागों ने ऑफिस में बैठकर अर्जेंट मैटर को एन्टरटेन करना शुरू किया। हम तो जिस दौरान दफ्तर बन्द था। उस दौरान भी हमारे स्टाफ ने मेहनत कर ऑनलाइन कम्पलेन्ट जिसमें कोई अर्जैन्ट इशु था उनके एन्टरटेन किया। जो अचानक फंस गए थे, बाहर से आए थे, पासिस नहीं मिल रहे थे। उनको अप्रोच किया। सभी जिलों को डायरेक्शन दी उन लोगों को रिलीफ मिली। उस दौरान जो लोग परेशान थे। उनकी मदद सरकार ने तो की साथ ही प्राइवेट आर्गेनाईजेशन समाजसेवी बढ़ चढ़ कर सामने आए।

गरीब तबके को राशन पहुंचा मदद पहुंची, प्रवासी मजदूर भी अपने घरों को जाने को बेताब थे उसके लिए कंसर्न अधिकारियों को हमने डायरेक्शन दी। उस पर सरकार ने काफी प्रयास किए। मेडिकल प्रोब्लम के लिए भी कंसर्न अथॉरिटी मदद की डायरेक्शन दी। मेडिकल फैसिलिटी के लिए हमने देखा कि कई जगह अर्जेन्ट रिक्वायरमेंट है उनको दी। बाद में अखबारों के माध्यम से पता चला कि बडे अस्पतालों में कोरोना के चलते ओपीडी बन्द कर ऑपरेशन भी बन्द हो गए थे। उन विषयों पर हमने स्वंय संज्ञान लिया। सरकार से कन्सल्ट अथॉरिटी से जवाब मांगा है। पीजीआई रोहतक मे ने जवाब दिया है। एक बात है इस समय जो मेडिकल स्टाफ है, प्रशासनिक अधिकारी हैं वो भी ओवरलोडिड हैं। हम समझते है। लेकिन समस्याएं हमारे पास आती है उनका निवारण करना हमारी सोच होती है। कैसे उनकी जरूरत को सामान उन तक पहुंचे।

प्रश्न- आपको ज्यादातर शिकायतें कोरोना से जुड़ी किस प्रकार की मिल रही हैं
उतर-  कोरोना काल में शुरू में अधिकतर खाने की, ऐसी भी मिली कि गवर्नमेंट आग्रेनाइजेशन के लोगों को समय पर तनख्वाह नहीं मिल रही। मीडिया के माध्यम से पता चला हरियाणा में 90 से ज्यादा ब्लाइंड इन स्ट्रक्चर थे जिनको खाने के लाले पड़े थे। कई महीने से तनख्वाह नहीं मिली थी। इन विषयों को भी हमने टेकअप किया। जो वापिस घर जाना चाहते थे उनको जाने की सुविधा मिल जाए। जो बुजुर्ग थे जिनको सही से मैडिकल ट्रीटमेंट चाहिए था। सम्भव प्रयास किए गए उनके लिए भी।

प्रश्न- कोरोनो पेशेंट हों या आम पेशेन्ट सभी को अस्पतालों में ट्रीटमेंट लेने में या दाखिल होने में दिक्कतें आ रही हैं
उतर- मैंने आपको बताया इस प्रकार की शिकायत आई थी। कोरोना काल में ऑपरेशन व बाकि सभी इलाज बन्द  हो गए थे। इसके लिए हम। कुछ फैसीलिटी शुरू हो भी गई है। हमारे पास मेडिकल स्टूडेंट्स की भी शिकायत आई थी कि हमें डयूटी पर बिना पीपीटी किट के ही लगा दिया गया है। हमने इसके लिए भी जवाब तलब किया है। क्योंकि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखना है। लेकिन हमें प्रशासनिक दिक्कतों को मजबूरियों को भी ध्यान में रखना है। हम उन्हें भी इग्नोर नहीं कर सकते।

प्रश्न- प्राइवेट कोरोना लैब से जुड़ी शिकायतें काफी सुनने को मिली कि वह टेस्ट के ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं। क्या आपके पास भी ऐसी कुछ शिकायतें पहुंची
उतर- ऐसी कोई शिकायत लैबोरेटरी से जुड़ा तो हमारे संज्ञान में नही आई है लेकिन ऐसा कोई केस आपके संज्ञान में आता है जिसमें किसी के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा हो। ऐसे हर मामले में एन्टरटेन करेगें। ऐसी कुछ शिकायतें सरकार के पास जरूर पहुंची थी जिस पर सरकार ने कड़ी कार्यवाही भी की है।

प्रश्न- हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने चण्डीगढ़ के अलावा कुछ ओर जगह भी सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। उनका आज क्या स्टेटस है
उतर- हम रेगुलर महीनें में 2 बार गुरुग्राम में अपनी कोर्ट लगाते हैं जिसमें वहां के 5 जिलों को एन्टरटेन करते हैं और भी 4-5 शिकायतें इधर उधर की आती हैं तो उन्हें भी एन्टरटेन करते हैं। लेकिन कोरोनाकाल में हमने यह रोका हुआ है। क्योंकि फिजीकली हियरिंग को हम कम से कम कर रहे हैं। ऑनलाइन रिक्वेस्ट से हम काम कर रहे हैं। हमे बताने में खुशी हो रही है कि हमारी रजिस्ट्री के अन्दर जो ज्यूडिशियल वर्क है उसकी पेंडेन्सी लगभग जीरो के लगभग है। हमारी स्थिति यह है कि 3 से 4 दिन में कम्पलेंट साइट के उपर लिस्ट हो जाती है। शायद देश में कोई ऐसा कमीशन में आग्रेनाइजेशन नहीं होगा जो इतना ज्यादा अप टू डेट हेागा।

प्रश्न- कोरोना काल से पहले और आज की शिकायतों की संख्या में कितना फर्क है
उतर- अभी कोरोना काल चल रहा है लेकिन फिर भी कोरोना काल से पहले और अब में कुछ खासा अन्तर नहीं आया है क्योंकि नेचर में फर्क आया है। कोरोना काल के चलते लोगों का बाहर निकलना भी बन्द हो गया था। जिससे कुछ शिकायतें पिछली कम हुई तो कोरोना से जुड़ी शिकायतें बढ़ गई तो कुल मिलाकर लगभग बराबर हैं। कोरोना काल समाप्त होने के बाद हम मानते हैं जो लोग अप्रोच नहीं कर पाए वो भी सामने आएगें।

प्रश्न- मानवाधिकार से जुड़ने के बादका आपका क्या अनुभव है। किस प्रकार की शिकायतें आपकों ज्यादातर मिलती हैं?
उतर- सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस विभाग से जुड़ी होती हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा ग्रेवैन्सिस और वायलेशन आफ हुमन राइट्स के एलिवेशन वहीं लगते हैं। बीच में  सरकार ने पुलिस कम्पलेंट अथॉरिटी भी बनाई थी लेकिन दुर्भाग्यश वो ज्यादा नहीं चल पाई। तो सभी मामले हमारे पास आते हैं। इसके अलावा बिजली विभाग, मेडिकल विभाग से जुड़े आते हैं। बीपीएल कार्ड से सम्बन्धित भी आते हैं। सभी को हम ध्यान से देखते हैं और उनके अधिकार दिलवाने के काम करते हैं।

प्रश्न-  मानवाधिकार आयोग से जुड़े कोई ऐसे मामले जो निहायत गरीब लोगों से जुड़े हों और कार्यवाही की गई हो
उतर- ऐसे तो बहुत से केस हैं। हमने कतार में अन्तिम छोर में खड़े व्यक्ति के लिए भी काम किया है। एक बच्चा जो आंखों से नेत्रहीन था। उसे दिल्ली से चण्डीगढ़ बस में अपनी मां के साथ जाना था। जो कि बस में चढ़ गया और चेंकिग स्टाफ ने बस को रोहतक रोक लिया और चेकिंग की। जिसमें स्टाफ ने उस बच्चे को बिना टिकट होने के कारण नीचे उतार दिया। जबकि सरकार की गाइडलाइन है कि विकलांग अपने सर्टीफिकेट के साथ पर्नी एक व्यक्ति के साथ बिना टिकट यात्रा कर सकता है। उन्होंने हमें कम्पलेंट भेजी। हमने जवाब तलब किया। उन्होंने उस बच्चे की मानसिक प्रताड़ना की थी। उसकी विकलांगता का मजाक उड़ाया था। हमने उस बच्चे को कम्पलसेशन दिलवाया। जो कि 2 लाख था। इस प्रकार से बहुत से केस हैं।

प्रश्न- कोरोना के चलते आपका आमजन के लिए क्या संदेश हैं
उतर- सरकारों ने मीडिया और कई माध्यमों से लोगों को जागरूक किया है और देश में जो यह बिमारी फैल रही है। उसका बहुत बड़ा कारण है कि जो लोग इस बिमारी को गंभीरता से नहीं ले रहे। हमे सरकार के आदेशों का पालन करना चाहिए। डिस्टेन्सिंग का पालन करना चाहिए, मास्क का प्रयोग करना चाहिए। हम मानते है। कि हमारे देश का रिकवरी रेट काफी ज्यादा है। लेकिन इसे और बेहतर बनाया जा सकता है इसके लिए जागरूकता की ओर अधिक आवश्यकता है। 


vinod kumar

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