कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी छात्र आंदोलन केस में 8 साल बाद राहत, कांग्रेस-जेजेपी नेताओं समेत 10 आरोपी बरी
punjabkesari.in Monday, May 25, 2026 - 06:22 PM (IST)
कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (केयूके) में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर वर्ष 2018 में हुए आंदोलन और हंगामे से जुड़े मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े 10 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। फैसले के बाद छात्र नेताओं और उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला।
यह मामला उस समय का है जब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर छात्र संगठनों ने जोरदार आंदोलन किया था। छात्रों ने सरकार द्वारा लागू की गई इनडायरेक्ट चुनाव प्रणाली का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी के थर्ड गेट पर भारी हंगामा हुआ था और कैथल-कुरुक्षेत्र मुख्य मार्ग को जाम कर दिया गया था।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों ने नामांकन प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश की और विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. नीता खन्ना की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया था कि 100 से 150 लोगों की भीड़ ने विश्वविद्यालय परिसर में चल रही चुनाव प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया।
पुलिस ने जसविंद्र खैहरा, शाहनवाज हुसैन, तरसेम काजल, विजेंद्र रंगा, संदीप डरोलिया, दिलबाग पाई, दिव्यांशु बुद्धिराजा समेत कई छात्र नेताओं और छात्राओं के खिलाफ IPC की धारा 147, 149, 186, 188 और 341 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस रिकॉर्ड में यह भी दर्ज किया गया था कि उस समय यूनिवर्सिटी परिसर में धारा 144 लागू थी, बावजूद इसके प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर जाम लगाए रहे।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने जसविंद्र खैहरा, कांग्रेस की टिकट पर करनाल लोकसभा चुनाव लड़ चुके दिव्यांशु बुद्धिराजा, शाहनवाज हुसैन, मंजू जाखड़, विनोद कुमार, सुमन, हरमनप्रीत कौर, तरसेम काजल, प्रवीन वती और ज्योति जैनी को बरी कर दिया।
फैसले के बाद यूथ जेजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष जसविंद्र खैहरा ने कहा कि वर्ष 2018 में छात्रों ने छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर आंदोलन किया था। सरकार ने चुनाव तो बहाल किए, लेकिन उन्हें प्रत्यक्ष की बजाय अप्रत्यक्ष कर दिया, जिसका छात्र संगठनों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और कई छात्र नेताओं पर केस दर्ज किए गए थे।
खैहरा ने कहा कि करीब आठ साल बाद कोर्ट ने सभी साथियों को न्याय दिया है। उन्होंने न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
कोर्ट के फैसले के बाद न्यायिक परिसर में छात्र संगठनों के नेताओं और समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई दी। वहीं इस फैसले को छात्र राजनीति से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।