डंकी रूट के जाल में फंसा कुरुक्षेत्र का युवक, 11 लाख गंवाए; बेलारूस जेल में काटे 7 माह

punjabkesari.in Monday, Jun 15, 2026 - 05:50 PM (IST)

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : बेहतर भविष्य और विदेश में रोजगार के सपने ने कुरुक्षेत्र के युवक रोहित को ऐसे डंकी रूट के जाल में फंसा दिया, जहां उसे महीनों तक प्रताड़ना, भूख, मारपीट और जेल की यातना झेलनी पड़ी। युवक का आरोप है कि भारतीय एजेंट ने उसे सीधे यूरोपीय देश मोल्दोवा भेजने का झांसा देकर पाकिस्तानी एजेंट के हवाले कर दिया, जिसने बेलारूस और लातविया सीमा क्षेत्र में उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया। करीब सात महीने जेल में बिताने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से वह 13 जून को अपने घर लौट पाया।

रोहित ने बताया कि उसके पिता मनोज कुमार टैक्सी चालक हैं। परिवार ने प्लॉट बेचकर और उधार लेकर उसे विदेश भेजने का सपना पूरा करने के लिए पिहोवा निवासी एजेंट विजय शर्मा से संपर्क किया। नौ लाख रुपये में हुई डील के बाद एजेंट ने सीधे मोल्दोवा भेजने का भरोसा दिया, लेकिन 9 अक्टूबर 2025 को उसे दुबई भेज दिया गया। वहां से रूस का वीजा भेजकर उसे मॉस्को पहुंचाया गया, जहां से एक पाकिस्तानी एजेंट उसे बेलारूस ले गया।

पैसे छीन लिए, तंबू में रखा, बीफ खाने को दिया

रोहित के अनुसार बेलारूस पहुंचते ही पाकिस्तानी एजेंट ने उसके पास मौजूद डॉलर छीन लिए और लगातार पैसों की मांग शुरू कर दी। पैसे नहीं मिलने पर उसे कमरे से निकालकर कड़ाके की ठंड में तंबू में रहने को मजबूर किया गया। उसने आरोप लगाया कि खाने के नाम पर केवल ब्रेड और पैकेटबंद बीफ दिया जाता था। हिंदू होने के कारण उसने बीफ खाने से इनकार कर दिया और केवल ब्रेड खाकर गुजारा किया।

वीडियो कॉल के जरिए मांगे गए पैसे

प्रताड़ना बढ़ने पर रोहित ने घरवालों को वीडियो कॉल कर अपनी स्थिति बताई। परिवार ने एजेंट के कहने पर लाखों रुपये और दिए, लेकिन कथित तौर पर वह रकम आगे नहीं पहुंची। इसके बाद एजेंटों ने मारपीट और धमकियां और बढ़ा दीं।

लातविया बॉर्डर पर सेना के हाथों भी झेली प्रताड़ना

रोहित ने बताया कि बाद में उसे अन्य लोगों के साथ बेलारूस-लातविया सीमा पार करवाई गई। सीमा पार करते ही लातविया की सेना ने उन्हें पकड़ लिया। युवक का आरोप है कि सैनिकों ने मोबाइल तोड़ दिया, घंटों बैठाकर रखा, मारपीट की और पूछताछ के दौरान करंट के झटके भी दिए। बाद में उन्हें सीमा पार वापस बेलारूस की ओर धकेल दिया गया।

फिर एजेंट के चंगुल में फंसा, अंततः पहुंचा जेल

सीमा क्षेत्र में भटकने के बाद वह दोबारा उसी पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में पहुंच गया। कुछ समय बाद एजेंट उसे बेलारूस की राजधानी मिन्स्क ले गया, जहां पुलिस के हवाले कर दिया गया। अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया, जहां उसने करीब सात महीने बिताए।

भारतीय दूतावास की मदद से हुई घर वापसी

जेल में रहने के दौरान उसे सीमित समय के लिए परिवार से बात करने की अनुमति मिली। बाद में भारतीय दूतावास की मदद से उसका इमरजेंसी पासपोर्ट तैयार हुआ। परिवार ने टिकट भेजी, जिसके बाद वह 13 जून को भारत लौट सका। बेटे की सुरक्षित वापसी से परिवार ने राहत की सांस ली है।

एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग

रोहित के पिता मनोज कुमार ने बताया कि पूरे घटनाक्रम में परिवार के करीब 11 लाख रुपये खर्च हो गए। उनका आरोप है कि एजेंट ने सीधे मोल्दोवा भेजने का वादा कर धोखा दिया और उनके बेटे की जिंदगी खतरे में डाल दी। परिवार अब पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर संबंधित एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेगा।


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Content Editor

Harman

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