Nuh : फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, दुष्कर्म और दहेज हत्या मामले के दोषियों को मिली कठोर सजा
punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 02:41 PM (IST)
नूंह (अनिल मोहनिया) : नूंह जिले की अदालतों ने दो अलग-अलग गंभीर मामलों में 2 दोषियों को कड़ी सजा सुनाते हुए कानून का सख्त संदेश दिया है। जिला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय कुमांर वर्मा की अदालत तथा फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) ने दहेज हत्या और नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में दोष सिद्ध होने पर दोषियों को 10 वर्ष और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों मामलों में कुल मिलाकर करीब 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पहला मामला
पहले मामले में थाना फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में वर्ष 2020 में दर्ज दहेज हत्या के प्रकरण में आरोपी लक्ष्मण निवासी वार्ड नंबर 7, फिरोजपुर झिरका को अदालत ने दोषी ठहराया है। यह मामला 23 मई 2020 को दर्ज किया गया था। पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में बताया था कि दो बेटियां का एक परिवार में विवाह किया था। लेकिन ससुराल पक्ष के लोग बेटियों को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे, जिसको लेकर विवाद था। इसी विवाद के चलते उनकी छोटी बेटी अनीता जो की 6 माह की गर्भवती थी, उसकी ससुराल पक्ष के लोगों ने फांसी लगाकर हत्या कर दी थी ।
इस संदर्भ में पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर केस दर्ज किया था। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी और 498-ए के तहत दोषी मानते हुए धारा 304-बी के अंतर्गत 10 वर्ष का कठोर कारावास तथा धारा 498-ए के अंतर्गत 3 वर्ष का कठोर कारावास और 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और आरोपी द्वारा विचाराधीन अवधि में बिताई गई हिरासत की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
दूसरा मामला
मामले में वर्ष 2022 अक्टूबर में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के प्रकरण में आरोपी साद उर्फ इक्का को दोषी करार दिया गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर नाबालिग को घर से जबरन ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता उस समय घर पर अकेली थी।
मामले में थाना फिरोजपुर झिरका में एफआईआर दर्ज की गई थी। विस्तृत सुनवाई और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) के न्यायाधीश डॉ. आशु संजीव तिनजान ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने विभिन्न धाराओं व पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोषी की विचाराधीन हिरासत की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। अदालत ने दोनों मामलों में स्पष्ट किया कि दोषियों को दी गई सजा कानून के प्रावधानों के अनुसार लागू की जाएगी। इन फैसलों से समाज में यह संदेश गया है कि महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध तथा दहेज जैसी कुरीतियों के मामलों में न्यायालय सख्त रुख अपनाए हुए है।
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