अहीरवाल की राजनीति में बदलाव की आहट, जाटलैंड से राव इंद्रजीत सिंह ने अपनों पर ही किए करारे वार

9/24/2021 9:35:59 AM

रेवाड़ी/महेंद्रगढ़, (योगेंद्र सिंह) : केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की अहीरवाल में निकली जन आशीर्वाद यात्रा के बाद से जो बदलाव की राजनीति का आगाज हुआ उस पर आज एक प्रकार से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने जाटलैंड के पटौदा गांव से मुहर लगा दी। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने और अपनी ही सरकार पर जमकर कटाक्ष किए। इस अवसर पर उन्होंने जन आर्शीवाद यात्रा और सीएम मनोहरलाल खट्टर के विधानसभा चुनाव में दिए गए ७५ पार के नारे पर भी कटाक्ष किए। इस अवसर पर राव इंद्रजीत ने साफ कर दिया कि वह राजनीति से रिटायरमेंट नहीं होंगे और जब तक स्वस्थ्य रहेंगे राजनीति के मैदान में डटे रहेंगे। वहीं उनकी पुत्री आरती राव ने भी साफ कर दिया कि वह जरूर चुनाव लड़ेंगी और इसके लिए समय का इंतजार करना होगा। किसान आंदोलन पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को किसानों से बातचीत करने की बात कह साफ कर दिया कि अब वह भाजपा के सामने में घुटने नहीं टेकेंगे और आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।


झज्जर जिले एवं रोहतक लोकसभा क्षेत्र की जाटलैंड पटौदा से उम्मीद के अनुसार राव इंद्रजीत सिंह ने अपनी ही सरकार पर जमकर निशाना साधा। पिछले कुछ समय से जिस प्रकार भाजपा ने पहले संगठन विस्तार में उनके करीबियों को नजर अंदाज करने एवं फिर अहीरवाल में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की जन आशीर्वाद यात्रा की रणनीति बनाई जिससे राव नाराज थे। हालांकि उस समय वह मौन रहे लेकिन वीरवार को पटौदा से साफ कहा कि भाजपा से अब कुछ नहीं चाहिए। अपनी और इलाके की इज्जत के साथ खिलवाड़ वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं सीएम मनोहरलाल खट्टर के ७५ पर नारे का मजाक उड़ाया और कहा पार्टी अब अहीरवाल तक ही सीमित होकर रह गई है।

उनके इस बयान को समझे तो अब उनके बिना प्रदेश सरकार की परिकल्पना करना संभव नहीं है। वैसे भी हरियाणा के सीएम बनने का सपना राव का बहुत पुराना है, पहले वह कांग्रेस में बगावती सुर अपनाकर उनसे अलग हुए और भाजपा में भी कुछ इसी अंदाज से उन्होंने अपनी आंखे दिखाई हैं। पहले मोदी की तारीफ फिर किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार को ही नसीहत देकर कहा कि उसे किसानों से बातचीत करना चाहिए। उनके बयान से साफ है कि अब भाजपा से समझौता करने के मूड में नहीं है। देश में सीएम बदलाव का जो दौर चल रहा है उससे हरियाणा में भी बदलाव की आहट चल रही है। इस समय राव का अग्रेसिव होना भाजपा के लिए नुकसान का सौदा है। सर्वविदित है कि अहीरवाल के अधिकतर विधायक राव इंद्रजीत के समर्थक ही हैं। आने वाले समय में अहीरवाल में राजनीतिक उठा-पठक पर सभी की नजर टिकी हुई है।

 
राव की रणनीति को पहले ही भांप गई थी भाजपा 

भाजपा के रणनीतिकार संभवत : राव इंद्रजीत की पूरी तरह स्टेडी करके ही बैठे थे। इसकी शुरूआत विधानसभा चुनाव में उस समय ही हो गई थी जब रेवाड़ी विधानसभा से आरती राव के लिए टिकट मांगा गया लेकिन भाजपा ने राव की बेटी को टिकट नहीं दिया। इसके बाद संगठन विस्तार में भी उनके करीबियों को अधिक महत्व नहीं दिया गया। राव के तेवरों से भलीभांति परिचित भाजपा ने अहीरवाल से अपनी पकड़ ढीली ना हो इसके लिए इसके लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को पहले ही मैदान में उतारकर यादव वोटों पर नियंत्रण का प्रयास शुरू कर दिया। भाजपा अहीरवाल में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अब भूपेंद्र यादव को यहां सक्रिय कर रही है और इसी से राव नाराज हो गए। आज राव इंद्रजीत सिंह ने साफ-साफ अपने दिल की बात कह भी दी। हालांकि भाजपा रणनीतिकार इसके लिए संभवत: पहले ही तैयार नजर आ रहे हैं।

 
शक्ति प्रदर्शन कर दिए संकेत मान जाओ वरना फिर..
राव इंद्रजीत सिंह ने पटौदा में शक्ति प्रदर्शन सिर्फ और सिर्फ भाजपा हाईकमान को अपनी ताकत, पावर और जनता का उनके प्रति अथाह प्रेम दिखाने के लिए ही किया। ताकि भाजपा हाईकमान उनकी अनदेखी ना करे और उनकी बात को गंभीरता से ले। हालांकि इसके पहले भी राव इंद्रजीत सिंह शहीदी दिवस पर पूर्व सीएम भजनलाल व भूपेंद्र हुड्डा को भी इसी प्रकार आंख दिखा चुके हैं। अबकी बार बारी भाजपा की है और सर्वविदित है कि भाजपा में उनके इस तेवर को शायद ही बर्दाश्त किया जाए। राव इंद्रजीत सिंह के यह तेवर देखकर अब सभी नेता यह सोचने लगे हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा। उनकी भाजपा से सुलह होगी या फिर वह एक बार अपने इंसाफ मंच या फिर किसी दूसरे राजनीतिक दल की ओर रूख करेंगे इस पर सभी की नजर है।

 


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Content Writer

Isha

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